- महाकाल में महंत गादी विवाद : अनुयायी सक्रिय, अफसरों ने साधी चुप्पी

उज्जैन। महाकाल मंदिर स्थित महानिर्वाणी अखाड़े की महंत गादी का विवाद शह और मात के खेल की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। सूत्र बताते हैं अब अखाड़ा प्रकाशपुरीजी की महंत से पुजारी बनने की कहानी को तलाशने में जुटा है।

ज्योतिर्लिंग महाकाल में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के पास भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के अलावा परिसर स्थित ओंकारेश्वर व नागचंद्रेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना करने का जिम्मा भी है। महाकाल के बाद ओंकारेश्वर मंदिर में ही सबसे अधिक चढ़ावा आता है। इधर नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में एक बार नागपंचमी के दिन खुलते हैं। इस दिन आने वाला चढ़ावा भी अखाड़े को मिलता है। मंदिर समिति इस दिन 250 रुपए के शीघ्र दर्शन टिकट की आय में से बड़ा हिस्सा अखाड़े को देती है। कुल मिलाकर अखाड़े को मंदिर से सालभर में लाखों रुपए प्राप्त होते हैं। अखाड़ा इस गादी को इसीलिए महत्वपूर्ण मानता है। यही कारण है अब महंत गादी की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति को ना देकर चार थानापतियों को सौंपी गई है। प्रकाशपुरीजी के ओंकारेश्वर का पुजारी नियुक्त होने की खबर ने अखाड़े की नींद उड़ा दी है। अब अखाड़ा इस कहानी को तलाशने में जुटा है कि प्रकाशपुरी को महंत से पुजारी कब व कैसे बनाया गया।

अफसर चुप

इधर मंदिर प्रशासन के अफसर मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि बीते दिनों हुई मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में उन्हें प्रति माह 15000 रुपए मानदेय तथा भस्मी बनाने में उपयोग होने वाले कंडे खरीदने के लिए 5000 रुपए प्रति माह देने का निर्णय हुआ था। लेकिन अब तक उन्हें यह राशि देने की शुरुआत नहीं हुई है।

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