उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Chintaman Ganesh चिंतामन गणेश मंदिर में बुधवार को चैत्र मास की पहली जत्रा लगी। पिछले सालों की तुलना में इस बार भक्तों की संख्या कम रही। बावजूद मंदिर प्रशासन ने भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया। दर्शनार्थियों को बाहर से भगवान के दर्शन हुए। पर्व विशेष पर पुजारियों ने भगवान का पूर्ण स्वरूप में शृंगार किया था।

पंचागीय गणना से देखें तो 44 साल बाद चैत्र मास की जत्रा पर पर्व त्योहारों का विशेष संयोग बन रहा है। बुधवार को भाईदूज पर पहली जत्रा लगी। हालांकि मंदिर में पिछले कुछ समय से चल रही अव्यवस्था के चलते इस बार दर्शनार्थियों की संख्या कम रही।

अफसरों का कहना था कि भीड़ कम होने पर भक्तों को भीतर से भगवान चिंतामन गणेश के दर्शन कराए जाएंगे। लेकिन बुधवार को स्थिति इसके उलट नजर आई, भीड़ कम होने पर भी भक्तों को बाहर से दर्शन कराए गए। मंदिर प्रशासन भीड़ की स्थिति के अनुसार दर्शन व्यवस्था में परिवर्तन का निर्णय नहीं ले पाया। इससे भक्तों को दूर से भगवान के दर्शन करना पड़े। दोपहर तक मंदिर में इक्का-दुक्का भक्त ही नजर आ रहे थे।

मंदिर परिसर में निर्माण के चलते प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं कर पाया। परिक्रमा पथ के आसपास बुडन फ्लोर लगाकर श्रद्धालुओं के लिए आवागमन की व्यवस्था की गई थी। पहली जत्रा पर श्रद्धालुओं की संख्या कम होने से यह व्यवस्था चल गई। लेकिन आने वाली जत्रा में परेशानी बढ़ेगी। क्योंकि तीसरी जत्रा से आसपास के गांवों से ग्रामीण भगवान को अर्पित करने के लिए नई फसल लेकर आएंगे।

ऐसे में इसके लिए अतिरिक्त इंतजाम करना होंगे। चैत्र में पाती के लगन लिखाने के लिए भी सैकड़ों भक्त मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में पुजारियों के बैठने के लिए अलग से इंतजाम करना भी परेशानी का कारण बनेगा।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

fantasy cricket
fantasy cricket