उज्जैन। उज्जयिनी के षड्विनायक में से एक दुर्मुख विनायक भक्तों की आस्था का केंद्र है। इन्हें चोर गणेश भी कहा जाता है। अंकपात चौराहा से रामजनार्दन मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर चोर गणेश का मंदिर हैं। यहां तीन फीट ऊंची पाषाण पर ऊंकेरी हुई वरद हस्त मुद्रा में भगवान गणेश की मूर्ति विराजित है।

जनश्रुति में कहा जाता है कि कालांतर में जब जोर शहर में कहीं भी चोरी करने जाते, तो भगवान गणपति से प्रार्थना करते थे। मन्नत पूरी होने पर भगवान को भेंट चढ़ाई जाती थी। इसी कारण दुर्मुख गणेश का नाम चोर गणेश पड़ा। मंदिर में सुबह व शाम 7 बजे आरती होती है। मंदिर की दीवार पर संकट नाशनम् महागणपति स्तोत्रम् व लाभार्थ अष्टविनायक स्तोत्रम् लिखा है। भगवान गणेश की पूजा अर्चना करने वाले भक्त विभिन्न् स्तोत्र का सरलता से पाठ करते हैं।

Posted By: Prashant Pandey