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- कंजंक्टिवाइटिस व आंखों से संबंधित कोई समस्या है तो ना बरतें लापरवाही

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मानसून के दौरान हवा में आर्द्रता बढ़ते ही हानिकारक जीवाणु सक्रिय हो जाते हैं । इस कारण इन दिनों आंखों के संक्रमण की आशंका भी काफी बढ़ जाती है। जिसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है।

प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ अर्पित ऐरन के अनुसार वर्षा ऋतु में कंजंक्टिवाइटिस , जिसे आम भाषा में आंखें आना भी कहा जाता है, सबसे आम संक्रमण होता है । इसमें आंखें लाल हो जाती है, खुजली होती है और पानी आता रहता है। ये समस्याएं बच्चों को बहुत प्रभावित करती हैं । इसकी शुरुआत एक आंख से होती है, लेकिन जल्द ही दूसरी आंख भी इसकी चपेट में आ जाती है। यह मिथक है कि किसी की लाल आंखों में देखने से कंजंक्टिवाइटिस होता है। यह संक्रमित व्यक्ति के तौलिया, बेडशीट, रूमाल के उपयोग करने से होता है। इसलिए संक्रमित व्यक्ति का तौलिया, रूमाल व बेडशीट का उपयोग ना करें, उन्हें अलग रखें और गर्म पानी से धोएं, बार-बार आंखों को हाथ ना लगाएं, चश्मा लगाकर रखें।

डा. एरन के अनुसार वर्षा काल में आंखों में गुहेरी होना भी आम समस्या है। यह पलक में होने वाली ग्रंथि में होती है। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार गुहेरी हो रही है तो उसे अपनी मधुमेह की जांच करवाना चाहिए, इसके अलावा बच्चों को होने पर उनके चश्में का नंबर जरूर जांच करवाएं।

वहीं 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को मोतियाबिंद की बीमारी होती है। समय-समय पर जांच करवाएं वहीं खासतौर पर मधुमेह के मरीजों को सालभर में एक बार पर्दे की जांच करवाना जरूरी है। समय पर उपचार होने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

बच्चों को मोबाइल ना दें

डा. ऐरन के अनुसार आजकल आंखों की बीमारी के मरीजों में बच्चों की संख्या बढती जा रही है। खासतौर पर अधिक देर तक मोबाइल देखने वाले बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं। बच्चों को आंखों की बीमारी से बचाने के लिए भोजन में हरी सब्जी, मौसमी फल, अंकुरित अनाज, दालें जरूर शामिल करें। बार-बार बच्चा छोटी आंख कर रहा है, आंखें तिरछी करके देख रहा है अथवा बहुत पास से टीवी देखता है तो उसकी नियमित जांच जरूर करवाएं।

मेरी उम्र 60 वर्ष है आंखों से कम दिखता है

घनश्याम वर्मा

बढ़ती उम्र और हमारे खानपान का आंखों पर असर होता है। मोतियाबिंद 55 से 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को होने वाली आम बीमारी है। इसलिए समय पर जांच करवाएं जिससे कि उपचार जल्दी हो सके।

मुझे मधुमेह की बीमारी है इसका आंखों पर क्या असर होता है

विकास सेन

मधुमेह की बीमारी में आंखों पर असर होता है। साल में एक बार आंखों के पर्दे की जांच जरूर करवाएं। देरी होने पर आंखों में खून उतर आता है जिसका इलाज काफी जटिल व खर्चीला है। इससे बचने के लिए समय पर उपचार जरूरी है।

मेरी आंखों में पानी आता है तथा खुजली होती है

रीना शर्मा

यह एलर्जी के कारण होने वाली समस्या है। चश्मा पहनने, एंटी एलर्जी दवाएं तथा आइ ड्राप डालने से एलर्जी कम होती है और समस्या से बचा जा सकता है। जब भी बाहर निकलें चश्मा पहनें एवं धूप व धूल से आंखों को बचाकर रखें।

मेरा बालक बहुत पास से टीवी देखता है, उसकी आंखों में कोई समस्या तो नहीं

विभुति उपाध्याय

बच्चों को दिनभर मोबाइल व टीवी ना देखने दें, इससे आंखों पर बुरा असर होता है। कम उम्र में ही बच्चों को अधिक नंबर के चश्मे लग जाते हैं। बच्चों की आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए उन्हें हरी सब्जी, दालें, अकुंरित अनाज, मौसमी फल दें।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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