उज्जेन। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव शयन होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार देव शयन के बाद विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। चातुर्मास के चार माह धर्म पारायण, तीर्थाटन, भागवत श्रवण, जप-तप तथा व्रत का नियमन होगा। साथ ही विष्णु तथा शिव से संबंधित विशेष पर्व तथा त्योहार मनाए जाएंगे।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार आषाढ़ मास की देव शयनी एकादशी पर चातुर्मास के व्रत का नियमन शुरू हो जाता है। विष्णु पुराण के अनुसार चातुर्मास के चार माह भगवान विष्णु सृष्टि का भार भगवान शिव को सौंप कर राजा बलि के यहां विश्राम के लिए चले जाते हैं।

इस बार 12 जुलाई को शुक्रवार के दिन विशाखा नक्षत्र, साध्य योग तथा तुला राशि के चंद्रमा की साक्षी में देव शयन होगा। पंचाग की यह स्थित एकादशी के व्रत के हिसाब से महत्वपूर्ण है।

चातुर्मास में यह व्रत त्योहार प्रमुख

-16 जुलाई गुरु पूर्णिमा

-01 अगस्त हरियाली अमावस्या

-05 अगस्त नागपंचमी

-15 अगस्त रक्षा बंधन

-19 अगस्त बहुला चतुर्थी

-21 अगस्त हल छठ

-23 अगस्त जन्माष्टमी स्मार्त मत

-24 अगस्त जन्माष्टमी वैष्णव मत

-25 अगस्त गौगा नवमी

-01 सितंबर हरितालिका तीज

-02 सितंबर पार्थिव गणेश स्थापना

-03 सितंबर ऋषि पंचमी

-08 सितंबर तेजा दशमी

-09 सितंबर डोल ग्यारस

-12 सितंबर अनंत चतुर्दशी

-13 सितंबर श्राद्ध पक्ष आरंभ

-29 सितंबर शारदीय नवरात्र का आरंभ

-03 अक्टूबर दशहरा

-13 अक्टूबर शरद पूर्णिमा

-17 अक्टूबर करवा चौथ

-25 अक्टूबर धन तेरस

-27 अक्टूबर दीपावली

-08 नवंबर देव उत्थापनी एकादशी