उज्जैन(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मोक्षदायिनी शिप्रा किनारे हर साल कार्तिक पूर्णिमा से लगने वाला लोक पारंपरिक मेला सोमवार को शुरू हुआ। हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण के कारण मेले के लिए केवल रस्म अदायगी की जा रही है। मेले में इस बार न कोई दुकान है और न झूला। मंचीय प्रस्तुति देखने के लिए दर्शकों का भी टोटा है।

अखिल भारतीय कालिदास समारोह के बाद अब नगर निगम का लोक पारंपरिक कार्तिक मेला भी कोरोना संक्रमण की भेंट चढ़ गया। कलेक्टर के आदेश से नगर निगम आयुक्त ने सोमवार को मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। उद्घाटन प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने किया। पहले दिन सांस्कृतिक मंच पर जो लोकनाट्य माच का मंचन हुआ, उसे देखने भी कुछ निगमकर्मियों और अतिथियों के अलावा बाहरी दर्शक नहीं मिला। जानकारों ने कहा है कि ये पहली बार है, जब मेला महीनेभर की बजाय केवल तीन दिन का लगाया जा रहा है। जबकि पिछले साल तक मेला गरीमामयी तरीके से महीनेभर का लगता रहा है। तब भी जब चुनाव आचार संहिता लागू थी। कार्तिक का मेला उज्जैन की लोकपरंपरा के साथ यहां के व्यापार-व्यवसाय को बढ़ाने में भी उपयोगी रहा है। इस बार मेले में दुकान की अनुमति न मिलने से व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ है। चकरी-झूलेवालों की भी आय मारी गई है।

मेले में आज अभा कवि सम्मेलन

कार्तिक मेला मंच पर मंगलवार शाम अखिल भारतीय कवि सम्मेलन होगा। निगम ने काव्य पाठ के लिए भोपाल के मदनमोहन समर, जयपुर के अब्दुल गफ्फार, धार के जॉनी बैरागी, ग्वालियर के तेज बैचेन, उदयपुर के बलवंत बल्लू, इंदौर की डॉ. भुवन मोहिनी, देवास के शशिकांत यादव, उज्जैन के सुरेंद्र सर्किट, सतीश सागर, अशोक भाटी को आमंत्रित किया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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