उज्जैन। ये हैं मनस्विता तिवारी, जिनके बारे में 19 साल पहले डॉक्टरों ने मां से कहा था कि बेटी सेरिब्रल पाल्सी नामक गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। जिंदगीभर गोद में रखना पड़ सकता हँ। लेकिन स्थिति यह है कि आज वे शहर की मानी हुई पैरास्वीमिंग चैंपियन हैं। इन्होंने 17 मेडल और ट्रॉफियां जीतकर डॉक्टरों की कही बात को झुठला दिया है। मनस्विता, एलपी भार्गव नगर निवासी कल्पना-मनोज तिवारी की बेटी हैं। हाल ही में उन्हें मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह में संभागायुक्त और कलेक्टर ने सम्मानित किया था। कल्पना तिवारी का कहना है कि जन्म के समय मनस्विता सामान्य बच्चों की तरह रोई भी नहीं थी। डॉक्टरों ने जब उसकी बीमारी के बारे में बताया तब पूरा परिवार तनाव और अवसाद में आ गया था। मनस्विता को शुरू में देखने में भी बहुत दिक्कत होती थी। डॉक्टरों ने कहा था कि बढ़ती उम्र के साथ पता चलेगा कि मनस्विता को और क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं। पढ़ने-लिखने में समस्या होने के कारण मनस्विता को 9वीं कक्षा तक ग्रेस से पास किया गया।

मां ने दूसरी मुश्किल परीक्षा से भी उभारा

मनस्विता के जीवन में सबसे मुश्किल परीक्षा बाकी थी। मनस्विता के पिता कॉलेज में प्रोफेसर थे। एक दिन अचानक हार्ट अटैक से उनकी मृत्यु हो गई। फिर भी मनस्तिवा का जीवन संवारने के लिए मां ने हिम्मत जुटाई और फिजियोथैरेपिस्ट की सलाह पर उसे तैरना सिखाया। अभ्यास रंग लाया तो वह देश-विदेश की प्रख्यात पैरास्वीमिंग खिलाड़ी बन गई। आज उसके पास 17 मेडल और सर्टीफिकेट हैं।

कोठी की सीढ़ियां चढ़कर चलना सीखा

मनस्विता की मां ने बताया कि तैरना सीखने से पहले मनस्विता के लिए जमीन पर पैर जमाकर चलना ज्यादा जरूरी था। इसके लिए रोज शाम को कोठी पैलेस की सीढ़ियों पर उसे चढ़ने और उतरने का अभ्यास कराती थी। इस उतार-चढ़ाव से उसके पैरों की मांस-पेशियां विकसित हुईं। स्वीमिंग करने से उसके मस्तिष्क में रक्त का संचार अच्छा होने लगा तो आईक्यू लेवल भी सामान्य बच्चों के बराबर हो गया है। अब तक हुई प्रतियोगिताओं में मनस्विता का सर्वाधिक रिकॉर्ड 400 मीटर फ्री स्टाइल स्वीमिंग रहा है। इसके अलावा 400 मीटर स्वीमिंग में 50 मीटर के 8 लैप बिना रुके लगाए हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network