उज्जैन। शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर रविवार को नगर की सुख समृद्धि के लिए मदिरा की धार से नगर पूजा होगी। सुबह 8 बजे कलेक्टर शशांक मिश्र चौबीसखंभा माता मंदिर में माता महामाया व महालया को मदिरा का भोग लगाकर नगर पूजा की शुरुआत करेंगे। इसके बाद शासकीय अधिकारी व कोटवारों का दल 40 से अधिक देवी व भैरव मंदिरों में पूजा अर्चना करने के लिए रवाना होगा। शहर में 27 किलोमीटर लंबे मार्ग पर सतत मदिरा की धार लगाई जाएगी तथा बड़बाकुल (भजिए पूरी) अर्पित किए जाएंगे। करीब 12 घंटे पूजन का सिलसिला चलेगा। रात करीब 8 बजे गढ़कालिका क्षेत्र स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में पूजा अर्चना के बाद समापन होगा।

तीर्थ नगरी अवंतिका देश की सप्तपुरियों में बड़ी है। नगर में स्थित देवी व भैरव शहर की सुरक्षा व शक्ति का संतुलन करते हैं। शारदीय नवरात्र में शासन की ओर से इनके पूजन की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है। नगर पूजा में करीब 25 बोतल मदिरा का उपयोग होता है। भोग के लिए एक दिन पहले सप्तमी की शाम को चौबीस खंभा माता मंदिर परिसर में पूरी व भजिए बनाए जाते हैं।

अष्टमी पर कलेक्टर देवी को मदिरा की धार लगाकर नगर पूजा की शुरुआत करते हैं। इसके बाद शासकीय दल अन्य मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए रवाना होता है। ढोल ढमाकों के साथ ध्वजा लेकर दल नगर में 27 किलो मीटर लंबे मार्ग पर स्थित देवी व भैरव मंदिर में पूजा करते हैं। तांबे के पात्र में भरी मदिरा की धार नगर में प्रवाहित की जाती है। मान्यता है इससे अतृप्त तृप्त होते हैं तथा नगर को सुख समृद्धि तथा खुशहाली प्रदान करते हैं। इस खास परंपरा को देखने के लिए दूसरे शहरों से भक्त उज्जैन पहुंचते हैं। महाकाल की नगरी उज्जैन कई परंपराओं को समेटे हुए है। इसी में से नवरात्र के दौरान होने वाली यह भी एक परंपरा है।

Posted By: Prashant Pandey