उज्जैन। नागझिरी पोहा फैक्ट्री में शुक्रवार को आग लगने से तीन महिला मजदूरों की मौत हो गई थी। मामले की जांच करने के लिए सोमवार को डीआइजी अनिल सिंह कुशवाह पहुंचे। फैक्ट्री में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज में पता चला है कि आग अचानक भड़की और धूल से बचने के लिए लगाई गई पालीथिन जलते हुए महिलाओं पर गिरी थी। इनसे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपित फैक्ट्री संचालक व मैनेजर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है।

नागझिरी उद्योगपुरी स्थित बिंदल पोहा फैक्ट्री में शुक्रवार शाम को आग लग गई थी। इससे फैक्ट्री में काम कर रही दुर्गाबाई, क्षमाबाई उम्र 45 वर्ष निवासी नागझिरी, ज्योतिबाई उम्र 35 वर्ष निवासी नागझिरी की जलने से मौत हो गई थी। वहीं सीमा वाघेला बुरी तरह झुलस गई थी। मंगलवार को डीआइजी अनिल सिंह कुशवाह फैक्ट्री पहुंचे थे। यहां उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया। जांच में पता चला है कि फैक्ट्री में डस्ट से बचने के लिए ऊपर की ओर पालिथिन लगाई गई थी। शार्ट सर्किट से आग लगने के कारण उपर लगी पालिथिन ने आग पकड़ ली और एकदम से भभक गई। जलती हुई पालिथिन महिला मजदूरों पर गिरी थी। जिससे उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला और वहीं जलने से उनकी मौत हो गई।

केमिकल की आशंका

डीआइजी कुशवाह ने बताया कि पालीथिन इतनी तेजी से आग नहीं पकड़ती है। आशंका है कि कोई केमिकल या कुछ और भी पालीथिन पर था जिससे एकदम आग फैली थी। इसकी जांच करने को कहा गया है। फैक्ट्री में औद्योगिक सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी। इसके चलते दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।

सीएम से कहा था दोषियों पर हो कार्रवाई

सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के उज्जैन दौरे के दौरान मृतक महिलाओं के स्वजन ने हेलीपेड पर मुलाकात की थी। परिवार के लोगों ने कहा था कि फैक्ट्री मालिक दो-दो लाख रुपये देकर कार्रवाई नहीं चाहता है। परिवार की मांग है कि फैक्ट्री मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बाद सीएम ने कार्रवाई के आदेश जारी किए थे।

पुलिस ने चार दिन बाद दर्ज किया केस

फैक्ट्री में आग लगने के बाद पुलिस ने मौके से सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर जब्त कर लिया था। इसके अलावा जली हुई केबल भी एफएसएल जांच के लिए सागर भेजने के लिए जब्त की गई थी। टीआइ विक्रम इवने ने बताया कि पुलिस को जांच में पता चला है कि फैक्ट्री में जिस स्थान पर आग लगी थी वह तीन ओर तथा छत पर मोटी प्लास्टिक की तिरपाल से ढंका हुआ था। इस कारण किसी भी प्रकार की गैस या हवा निकलने के लिए स्थान नहीं था। कारखाने में भारी विद्युत मोटरों के गर्म होने के बाद शीघ्र ठंडा किए जाने के लिएभी युक्तियुक्त प्रणाली नहीं लगी थी। इस कारण अचानक आग लग जाने पर उसे नियंत्रित करने के लिए भी कोई साधन नहीं थे। घटनास्थल पर बड़ी मात्रा में जल्द जलने वाली ज्वलनशील सामग्री पड़ी हुई थी। प्लास्टिक की तिरपाल को भी लंबे समय से साफ नहीं किया गया था। इससे उस पर चावल की भूसा लगा हुआ था। पोहा बनाने के लिए धान को भी गिला करके वहां रखा गया था, जिससे ज्वलनशील गैस निकलती है। इस कारण आग लगने पर महिलाओं की मौत हो गई। मामले में फैक्ट्री संचालक राकेश बिंदल निवासी महाश्वेता नगर तथा मैनेजर सागर यादव निवासी हामूखेड़ी के खिलाफ धारा 285, 308, 304 के तहत केस दर्ज किया गया है।

Posted By: Prashant Pandey

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