उज्जैन। विश्वप्रसिद्घ ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के भस्मी कक्ष में मंगलवार शाम आग लग गई। कक्ष से लपटें निकलते देख मंदिर कर्मचारी दौड़े ओर अग्निशमन यंत्रों से आग पर काबू पाया। बाद में फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई। घटना के वक्त कक्ष में कोई नहीं था। कंडे सहित कुछ केबलें जली हैं।

मंदिर परिसर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के पिछले हिस्से में भस्मी कक्ष है। इसमें तड़के 4 बजे होने वाली बाबा महाकाल की भस्मारती के लिए कंडों को जलाकर भस्मी तैयार की जाती है। महानिर्वाणी अखाड़े के साधु 51 कंड़े जलाकर भस्म तैयार करते हैं। शाम भी भस्म तैयार करने के लिए कक्ष में कंडे धुनी पर रखे गए थे। इस बीच कक्ष में रखे कंडों में आग लग गई और देखते ही देखते फैलने लगी। लपटें मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर तक पहुंच गईं। मंदिर कर्मचारियों की तत्परता से बड़ा हादसा होने से टल गया।

आग फैलने का यह भी कारण

ओंकारेश्वर मंदिर पत्थरों से बना है। इसमें ही भस्मी कक्ष है। धुनी की आग से मंदिर के पत्थर गर्म नहीं हों, इसके लिए कक्ष की दीवार को गोबर से निरंतर लीपा जाता है। सालों से लिपाई के कारण दीवारों पर गोबर की मोटी परत जम गई है। आग लगने के बाद जब लपटें उठीं, तो दीवार पर जमा गोबर की परत भी जलने लगी। इस कारण आग अधिक फैल गई।