उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अगहन मास की अमावस्या पर शनिवार को पूर्ण सूर्य ग्रहण रहेगा। यह ग्रहण अंटार्टिका, अफ्रीका के दक्षिणी भाग, आस्ट्रेलिया के दक्षिणी भाग, अटलांटिक सागर के दक्षिणी भाग तथा हिंद महासागर के दक्षिणी भाग में दिखाई देगा। भारत में इसका कोई प्रभाव नहीं रहेगा, ना ही ग्रहण नजर आएगा। ज्याोतिषियों के अनुसार शनीश्चरी अमावस्या पर श्रद्धालु धर्मशास्त्रीय मान्यता अनुसार स्नान, दान आदि धर्म अनुष्ठान कर सकते हैं।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार अमावस्या पर सूर्य, बुध, चंद्र, केतु की चतुगर््रही युति रहेगी। वृश्चिक राशि पर होने वाले इन चार ग्रहों की युति के प्रभाव अलग-अलग होंगे। धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार देखें तो वृश्चिक स्थित सूर्य-केतु की युति का ग्रहण के रूप में कोई प्रभाव नहीं होता है, यह ग्रहण मान्य नहीं है।

भारत में पृथ्वी से सूर्य के अंश का जो अंतर है, वह भी ग्रहण होने की संभावना को नकारता है। वर्तमान में सूर्य 12 अंश 48 कला व 56 विकला पर है। जबकि केतु 7 अंश 6 कला और 49 विकला पर अवस्थित होने से यह ग्रहण भारत में मान्य नहीं है। सुदूर दक्षिण-पूर्व क्षेत्रों में सूर्य ग्रहण का प्रभाव रहेगा और दिखाई भी देगा।

सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा ग्रहण

शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डा.राजेंद्र प्रकाश गुप्त के अनुसार अमावस्या पर पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। अंटार्टिका, अफ्रीका, आस्ट्रेलिया आदि देशों में सुबह 10 बजकर 59 मिनट पर सूर्य ग्रहण की शुरुआत होगी। मध्य दोपहर 1 बजकर 4 मिनट पर तथा मोक्ष दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर होगा। ग्रहण की पूर्णता अवधि 1 घंटा 7 मिनट की रहेगी। इस दौरान विदेश के कुछ हिस्सों में अंधेरा भी छाएगा।

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