Gajachaya Yog 2021: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सर्वपितृ अमावस्या 6 अक्टूबर को सर्वार्थसिद्धि के साथ गज छाया योग बन रहा है। साथ ही ग्रह मंडल के तीन प्रमुख ग्रह हस्थ नक्षत्र में मौजूद रहेंगे। हस्थ नक्षत्र में पांच तारे हैं, आसमान में इनकी आकृति आशीर्वाद देते हुए हाथ की तरह है। धर्मशास्त्रीय मान्यता में सर्वपितृ अमावस्या पर योग, नक्षत्र व ग्रहों की प्रबल स्थिति में कुतुप काल के समय पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान कर ब्राह्मण भोजन, गाय, कौआ, श्वान को भोजन का भाग तथा भिक्षुकों को अन्ना्‌ तथा तीर्थ पर वैदिक ब्राह्मण को वस्त्र, पात्र का दान करने से पितरों को उसका महा पुण्य फल प्राप्त होता है। साथ ही श्राद्धकर्ता की मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार बुधवार के दिन हस्त नक्षत्र के साथ अमावस्या का पूरा योग गज छाया कहलाता है। पौराणिक मान्या के अनुसार गज छाया योग के संबंध में अलग-अलग मान्यता है। गज का अर्थ हाथी होता है, नक्षत्र मंडल में जब हाथी के समान आकृति बनती है, तो उसे गज छाया कहा जाता है। हस्थ नक्षत्र का एक अर्थ हाथ भी मना जाता है। नक्षत्र मंडल में जब हस्त नक्षत्र में सूर्य का परिभ्रमण होता है, तो इस प्रकार की आकृतियों का अनुक्रम बनता है, जो पितृकर्म के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसमें भी अगर अमावस्या तिथि हो तथा अमावस्या तिथि पर सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग भी बनाकर रहा तो किए गए पितृकर्म कर्म का एक हजार गुना उत्तम फल प्रदान करने वाला माना गया है।

तीन महत्वपूर्ण ग्रह हस्त नक्षत्र में

सर्वपितृ अमावस्या पर सूर्य,चंद्र, मंगल तीन ग्रह हस्त नक्षत्र में रहेंगे। ग्रह गोचर में ग्रहों के परिभ्रमण की स्थिति और नक्षत्रों पर इनका प्रभाव अलग-अलग होता है। यह भी विशेष माना गया है कि इस दौरान कोई महापर्व या पितृ पर्व आता है तो यह और भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। क्योंकि सतयुग, त्रेता युग तथा द्वापर युग में भी इनकी महत्ता को प्रतिपादित किया गया है। इसलिए कलयुग में भी इस प्रकार के योग का बनना दुर्लभ माना जाता है। इस प्रकार के योग में पितरों को विष्णु लोक की प्राप्ति कराने के लिए विशेष श्राद्ध करना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network

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