Ganeshotsav 2021: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भगवान श्रीगणेश धर्म संस्कृति के आराध्य देव हैं। प्रत्येक शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। उज्जैन के षड्विनायकों के बारे में मान्यता है कि वनवास के दौरान उज्जैन आने पर भगवान राम, लक्ष्मण व सीता जी ने इनकी स्थापना की थी। आम दिनों में विघ्नहर्ता के मंदिरों में दर्शनार्थियों का तांता रहता ही है, गणेशोत्सव के इन 10 दिनों में देशभर से भक्त यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। इस बार भी शुक्रवार से इन मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ेगा। शहर में षड्विनायक कहां विराजे हैं, आइए जानते हैं नईदुनिया के साथ गणेश दर्शन यात्रा में।

चिंतामन गणेश

गांव चिंतामन में श्री चिंतामन गणेश का प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में भगवान गणेश की तीन मूर्तियां संयुक्त रूप से विराजित हैं। मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने चिंतामन गणेश, लक्ष्मण ने इच्छामन गणेश तथा माता सीता ने सिद्धि विनायक की स्थापना की थी। भक्त यहां चिंताओं से मुक्ति, इच्छित फल की प्राप्ति तथा कार्य सिद्धि के लिए चिंतामन गणेश के दर्शन व पूजन करने आते हैं।

दुर्वामुख गणेश

अंकपात चौराहे से श्रीराम जनार्दन मंदिर जाने वाले मार्ग पर सामने की ओर चोर गणेश मंदिर है। इन्हें दुर्वामुख गणेश भी कहा जाता है। किंवदंतियों के अनुसार प्राचीन काल में चोर जब चोरी करने जाते थे, तब भगवान से सफलता की प्रार्थना कर उन्हें भेंट चढ़ाते थे, इसलिए इस मंदिर का नाम चोर गणेश पड़ा।

अविघ्न विनायक

अंकपात चौराहे पर अखिल भारतीय पंच रामानंदीय अखाड़े के मुख्यद्वार के समीप श्री अविघ्न विनायक गणेश का मंदिर है। 40 वर्ग फीट मंदिर में करीब साढ़े तीन फीट ऊंची भगवान गणेश की मूर्ति विराजित है। मान्यता है कि भगवान अविघ्न विनायक के दर्शन करने से शुभ व मांगलिक कायर्ोें में आ रही बाधा दूर होती है।

स्थिरमन गणेश

महाकवि कालिदास की आराध्य देवी माता गढ़कालिका के मंदिर के पास स्थिरमन गणेश का मंदिर है। इन्हें सुमुख गणेश भी कहा जाता है। मंदिर में भगवान गणेश की दो मूर्ति विराजित हैं। बड़ी मूर्ति स्थिरमन तथा छोटी मूर्ति चिंताहरण गणेश की है। मान्यता है कि भगवान स्थिरमन गणेश के दर्शन व पूजन करने से चित्त में स्थिरता तथा चिंताओं से मुक्ति मिलती है।

लक्ष्मीप्रदाता गणेश

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में कोटितीर्थ कुंड के ईशान कोण में भगवान लक्ष्मीप्रदाता गणेश का मंदिर है। यहां भगवान गणेश के साथ माता रिद्धि-सिद्धि भी विराजित हैं। मान्यता है कि भक्त इस मंदिर में सुख,समृद्धि तथा लक्ष्मी प्राप्ति के लिए दर्शन करने आते हैं।

मोदकप्रिय गणेश

शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर के पीछे योगीपुरा में गुरु अखाड़े के परकोटे में भगवान मोदकप्रिय गणेश का मंदिर है। मोदकप्रिय गणेश के दर्शन करने से कष्टों का निवारण होता है। किंवदंती है कि मोदकप्रिय के दर्शन करने वाले भक्तों को उस दिन मिष्ठान्न् खाने का अवसर अवश्य प्राप्त होता है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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