उज्जैन। शनिश्चरी अमावस्या (पांच जनवरी) पर श्रद्धालुओं को त्रिवेणी पर नर्मदा का पानी स्नान के लिए उपलब्ध न होने पर कांग्रेस सरकार की किरकिरी के बाद प्रशासन सकते में है। अब अगले पर्व स्नानों पर पानी लाने के लिए पूरी ताकत लगाई जा रही है। शुक्रवार को एनवीडीए व पर्यटन विकास मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल ने शिप्रा नदी के प्रमुख घाटों का निरीक्षण किया।

अफसरों की बैठक लेकर दो टूक कहा- शिप्रा नदी में प्रमुख पर्वों के समय पानी होना सभी विभागों की जवाबदेही है। जो हो गया उसे छोड़ दें, लेकिन अगली बार ऐसा न हो। अब कोई बहाना नहीं चलेगा। वहीं एनवीडीए के उपाध्यक्ष रजनीश वैश्य ने कहा- एक माह का वक्त दीजिए फिर लोगों को पीने और किसानों को खेतों में पानी देने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध करा दूंगा।

कमलनाथ सरकार की नाराजगी के बाद शिप्रा में पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकारी मशीनरी में ऊपर से नीचे तक हड़कंप मचा हुआ है। मकर संक्रांति पर रामघाट व भूखीमाता घाट पर पानी उपलब्ध कराने के लिए तमाम अफसर रात-दिन एक कर रहे हैं। प्रदेश के एनवीडीए और पर्यटन मंत्री बघेल खुद शुक्रवार को शहर के दौरे पर आए। उन्होंने पहले त्रिवेणी, लालपुल और रामघाट क्षेत्र की स्थिति देखी। इसके बाद बृहस्पति भवन में पुलिस व प्रशासन सहित तमाम विभागीय अफसरों की बड़ी बैठक ली।

प्रदेश के एसीएस व एनवीडीए के उपाध्यक्ष वैश्य, विधायक महेश परमार, रामलाल मालवीय, मुरली मोरवाल, संभागायुक्त अजीत कुमार, आईजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर शशांक मिश्रा, एसपी सचिन अतुलकर, एडीएम जीएस डावर, एसडीएम गोपालचंद्र वर्मा, तहसीलदार अनिरूद्ध मिश्रा, पीडब्ल्यूडी के ईई जीपी पटेल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष कमल पटेल, शहर कांग्रेस प्रवक्ता विवेक गुप्ता आदि शामिल हुए।

मंत्री ने पूछा-शहर में पीने के पानी का संकट तो नहीं होगा?

गंभीर का पानी शिप्रा नदी में छोड़ने की जानकारी मिलने पर मंत्री बघेल ने अफसरों से पूछा- इससे शहर में पीने के पानी का संकट तो नहीं होगा। संभागायुक्त कुमार ने बताया कि गंभीर से केवल एक दिन की आपूर्ति का ही पानी लिया जाएगा। एनवीडीए ने कहा है कि वह इसकी भी पूर्ति कर देगा। हमने 15 जुलाई तक की प्लानिंग कर ली है। देवास से उज्जैन के बीच की पाइप लाइन फरवरी तक डालने का निर्णय लिया है। एनवीडीए के उपाध्यक्ष वैश्य ने कहा कि एक माह में पूरी व्यवस्था ठीक कर दी जाएगी। अगले माह से देवास की तरह उज्जैन में भी पेयजल के पानी देना शुरू कर देंगे। पीएचई के अधिकारियों से कहा आप अभी घबराइए मत, अभी गंभीर से शिप्रा में पानी पहुंचा दीजिए। हम गंभीर डेम में भी नर्मदा का पानी देने में सक्षम हैं।

तालमेल का अभाव था... अब बनेगी कमेटी और वार्षिक कैलेंडर भी

मंत्री बघेल ने कहा विभागों के बीच तालमेल न होने से शनिश्चरी अमावस्या (5 जनवरी) पर पानी उपलब्ध न होने की स्थिति बनी इसलिए समन्वय बहुत जरूरी है। इसके लिए प्रशासन एक कमेटी बनाए जिसमें विधायकों को भी शामिल किया जाए। प्रमुख पर्वों पर लोग श्रद्धा से स्नान करने आते हैं। पर्वों की तारीखें तय रहती है, इसलिए सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारी निभानी थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। आने वाले समय में तालमेल बनाकर काम करें। कोई भी विभाग ये न कहे कि उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं। इस तरह के मामले अब सामने नहीं आना चाहिए। शिप्रा में प्रमुख पर्वों पर पानी उपलब्ध कराना सब विभागों की जवाबदेही है। प्रशासन वार्षिक कैलेंडर बनाकर सभी को उपलब्ध कराए और इसके अनुसार ही पानी उपलब्ध कराएं। मंत्री बघेल ने कहा सीएम के निर्देश हैं कि जो हुआ वो अगली बार न हो।

मंत्री व पीएचई ईई के बीच सवाल-जवाब

बैठक की शुरुआत में शनिश्चरी अमावस्या पर पानी न आने को लेकर बहस भी छिड़ी। मंत्री और पीएचई ईई

धर्मेंद्रकुमार वर्मा के बीच सवाल-जवाब का दौर भी चला।

- मंत्री ने पीएचई ईई से पूछा पिछले साल शिप्रा में पानी कैसे लाए थे।

- ईई ने बताया एनवीडीए ने नर्मदा का पानी छोड़ा था।

- मंत्री ने पूछा कितने समय पहले आप मांग करते हैं।

- वर्मा ने कहा 15-20 दिन पहले।

- मंत्री ने फिर सवाल दागा और कहा इस बार तो आपने 4 जनवरी को ही डिमांड लेटर भेजा था।

- वर्मा ने कहा 24 अक्टूबर व 16 नवंबर को भी पानी मांगा था। दोनों डिमांड पेंडिंग चल रही थी। इस तरह 24 अक्टूबर से ही पानी नहीं आ सका था।