- भगवान महाकाल व श्रृंगी ऋषि पर प्रवाहित की जा रही सहस्त्र धारा

-55 ब्राह्मण पांच दिन तक सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक करेंगे मंत्र जाप

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। महाकाल मंदिर में देश, प्रदेश व नगर में उत्तम वर्षा की कामना से गुरुवार को महारूद्राभिषेक अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। भगवान महाकाल पर सहस्त्र जलधारा प्रवाहित की गई। 55 पंडितों ने नंदी मंडपम् में बैठकर पर्जन्य मंत्रों का जाप किया। 27 जून तक प्रतिदिन सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक अनुष्ठान किया जाएगा। पूर्णाहुति पर हवन होगा।

महारूद्र अनुष्ठान के पहले दिन मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष कलेक्टर आशीषसिंह ने सपत्निक भगवान महाकाल तथा श्रृंगी ऋषि का पूजन कर अनुष्ठान का शुभारंभ किया। पूजन करने वालों में मंदिर समिति सदस्य पुजारी प्रदीप गुरु, राम पुजारी तथा राजेंद्र गुरु भी शामिल थे। अनुष्ठान के आचार्य पं.घनश्याम शर्मा ने बताया पर्जन्य अनुष्ठान में श्रृंगी ऋषि का विशेष महत्व है। श्रृंगी ऋषि के मस्तक पर जन्म से ही सींग था, जिसके कारण उनका नाम श्रृंगी पड़ा। श्रृंगी ऋषि के आव्हान से इंद्र देव प्रसन्ना्‌ होते हैं तथा उत्तम वर्षा करते हैं। इसीलिए श्रृंगी ऋषि की मूर्ति पर भी भगवान महाकाल के साथ सतत जलधारा प्रवाहित कर अभिषेक किया जा रहा है। ब्राह्मण पर्जन्य मंत्रों की संपुटी के साथ पाठ कर रहे हैं।

सुबह गर्भगृह में प्रवेश, दिन में बाहर से दर्शन

महारूद्र अनुष्ठान के कारण महाकाल मंदिर की दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। दर्शनार्थियों को सुबह 6 से 9 बजे तक 1500 रुपये की रसीद पर गर्भगृह में प्रवेश दिया जा रहा है। सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक अनुष्ठान की अवधि में भक्तों को गणेश व कार्तिकेय मंडपम् से भगवान महाकाल के दर्शन कराए जा रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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