Janmasthan 2020 : उज्जैन। सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के गोपाल मंदिर में बाल गोपाल के सोने का समय तय नहीं है, इसलिए मंदिर में जन्माष्टमी से एकादशी तक चार दिन शयन आरती नहीं होती। मान्यता है बछवारस पर भगवान बड़े होते हैं, इस दिन दोपहर 12 बजे शयन आरती की जाती है। पुजारी अर्पित जोशी ने बताया जन्म लेने के कुछ दिनों तक बच्चों के सोने-जागने का समय निर्धारित नहीं होता है। इसी के चलते जन्माष्टमी के बाद चार दिन तक मंदिर में शयन आरती नहीं की जाती। पांचवे दिन बछबारस पर मंदिर के मुख्य द्वार पर बंधी माखन मटकी फोड़ते हैं। इस बार भी यह उत्सव 16 अगस्त को बछबारस पर दोपहर 12 बजे मनाया जाएगा।

धर्मधानी उज्जयिनी में मंगलवार को शैव मत के अनुसार जन्माष्टमी मनाई गई। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम व सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर में रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। बड़ा गणेश मंदिर में भी उत्सवी छटा बिखरी। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में संध्या आरती के बाद नैवेद्य कक्ष में बाल गोपाल की पूजा अर्चना हुई। घरों में भी कृष्ण जन्म का उल्लास छाया रहा। भरतपुर स्थित इस्कॉन मंदिर बुधवार को वैष्णव मतानुसार जन्माष्टमी मनाई जा रही है।

जयपुर के मोगरे से महका मंदिर गोपाल मंदिर

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर गोपाल मंदिर में सज्जा के लिए जयपुर से मोगरे के पुष्प मंगवाए गए थे। फूलों की खुशबू से मंदिर महक रहा था। रात 11 बजे पुजारी अमित जोशी के साथ अन्य पुजारियों ने भगवान गोपाल जी का पंचामृत अभिषेक का आकर्षक श्रृंगार किया। रात्रि 12 बजे मंदिर के पट खुले। इसके बाद पश्चात आरती की गई। आज नंद उत्सव मनाया जा रहा है, महिलाओं बधाई गाएंगे।

Posted By: Prashant Pandey

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