उज्जैन। महाकाल मंदिर में कर्मचारियों की हाजिरी भरने के लिए साल 2014 में थंब मशीन लगाई गई थी। इसके बाद भी कर्मचारियों को थंब के साथ ही रजिस्टर में भी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्थापना शाखा रजिस्टर के जरिए ही वेतन बना रही है। मामले को लेकर दोनों विभागों के अलग-अलग तक हैं। स्थापना शाखा का कहना है कि मशीन खराब रहती है, इसलिए ऐसा कर रहे। जबकि आईटी विभाग का कहना है कि मशीन कभी खराब नहीं हुई। हर माह उपस्थिति की जानकारी स्थापना को दे रहे हैं।

महाकाल मंदिर में दो विभागों के बीच तालमेल न होने का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। कर्मचारी पहले थंब इम्प्रेशन लगाते हैं, इसके बाद रजिस्टर में साइन करने के लिए उन्हें मंदिर कार्यालय जाना पड़ता है। इससे उनका समय और ऊर्जा बेजा जाया हो रहे हैं। इस स्थिति से अफसरों की मंदिर के कामकाज को पेपरलेस करने की मंशा को भी धक्का लग रहा है। आधुनिक सुविधा होने के बाद भी रजिस्टर से काम चलाया जा रहा है। मामले में आईटी शाखा के प्रभारी राजकुमारसिंह ने कहा कि मशीन खराब होने की बात गलत है। कर्मचारी रोजना हाजिरी मशीन के माध्यम से भर रहे हैं। इसकी जानकारी हर माह स्थापना शाखा को भेजी जाती है। अगर स्थापना इस जानकारी के आधार पर वेतन नहीं बना रही है तो यह उनका विषय है। हम इस बारे में कुछ नहीं कर सकते। दूसरी ओर स्थापना शाखा के प्रभारी मोहित ठाकुर ने कहा कि प्रारंभ में थंब इम्प्रेशन को लेकर गड़बड़ी सामने आई थी। कई मर्तबा हाजिरी भरने के बाद भी दर्ज नहीं हो रही थी। इसलिए रजिस्टर में भी साइन करवाते हैं।

गड़बड़ी की यह आशंका

दरअसल थंब मशीन लगाने के पीछे मकसद यह था कि कर्मचारी तय समय पर कार्यालय आएं। क्योंकि देरी से पर मशीन इसे पकड़ लेगी और डाटा कम्प्यूटर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं रहती। जबकि रजिस्टर से हाजिरी भरते समय देरी से आने पर भी निर्धारित समय अंकित किया जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि रसूखदारों कर्मचारियों ने थंब मशीन की बजाए रजिस्टर से वेतन बनाने का दबाव बना रखा है। हालांकि विभाग प्रभारी खुलकर कुछ भी नहीं कह पा रहे। अफसर इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे।

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