Krishna Janmashtami 2022: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन में जन्माष्टमी का पर्व जाेरशाेर से मनाया जा रहा है। सांदीपनि आश्रम, गोपाल मंदिर तथा इस्कान जैसे प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही भक्ताें की भीड़ लगी हुुई है। जैसे-जैसे कृष्ण जन्म का समय नजदीक आ रहा है, भक्तों का उल्लास भी ठाठे मार रहा है। लेकिन वैष्णव तीर्थ के रूप में विख्यात इन मंदिरों से इतर एक ऐसा मंदिर भी है, जहां सादगी से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। हम बात कर रहे हैं जयसिंहपुरा स्थित 250 साल पुराने जगदीश मंदिर की जहां भगवान जगन्नााथ सुभद्रा व बलदाऊ के बिना अकेले विराजित हैं। इस मंदिर का निर्माण सन् 1732-35 के बीच जयपुर के राजा जयसिंह ने वेधशाला निर्माण के दौरान कराया था, अब यह स्थान जगदीश मंदिर आश्रम के रूप में पहचाना जाता है।

महंत डा.रामेश्वर दास ने बताया जयपुर के राजा सवाई जयसिंह खगोलविद् थे। उन्होंने उज्जैन को कालगणना का प्रमुख केंद्र मानते हुए यहां वेधशाला का निर्माण कराया था। किंवदंतियों के अनुसार राजा जयसिंह ने वेधशाला के आसपास जयसिंहपुरा के नाम से एक मोहल्ले की बसाहट भी की थी। इसी में जगदीश मंदिर की स्थापना की गई थी। इस मंदिर में चंदन की लकड़ी से निर्मित भगवान जगन्नााथ की करीब ढाई फीट ऊंची मूर्ति स्थापित की गई थी। आमतौर पर जगदीश मंदिर में भगवान जगन्नााथ के साथ सुभद्रा व बलदाऊ की मूर्ति विराजित रहती है, लेकिन जयसिंहपुरा के इस मंदिर में केवल भगवान जगदीश की काष्ठ प्रतिमा विराजित है।

भक्तों के सहयोग से कराया मंदिर निर्माणः खाकी निर्वाणी अखाड़े के महंत डा.रामेश्वर दास ने सन् 1992 में यहां अपने आश्रम की स्थापना की थी। इसके बाद उन्होंने भक्तों के सहयोग से मंदिर का नवनिर्माण कराया। महंत बताते हैं प्राचीन मंदिर छोटा तथा जीणशीर्ण हो चुका था, इसलिए आश्रम में उसी स्थापन पर नए मंदिर का निर्माण कराया गया है। जिन भक्तों को मंदिर के संबंध में जानकारी है, वें यहां दर्शन करने आते हैं।

अनेक मंदिरों का निर्माण कराया जयसिंह नेः अश्विनी शोध संस्थान महिदपुर के निदेशक पुराविद व मुद्रा शास्त्री डा. आरसी ठाकुर के अनुसार राजा जयसिंह ने उज्जैन तथा आसपास के क्षेत्रों में भगवान जगन्नाथ के कई मंदिरों का निर्माण कराया था। इसमें महिदपुर व लालगढ़ का मंदिर भी शामिल है। उक्त दोनों मंदिरों में भी भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलदाऊ की मूर्तियां लकड़ी से निर्मित की गई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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