उज्जैन। नईदुनिया प्रतिनिधि। Lunar eclipse 2020 10 जनवरी को लगने वाले चंद्र ग्रहण को उज्जयिनी के ज्योतिषियों ने अमान्य किया है। उनका कहना है कि यह खगोलीय घटना छाया कल्प की श्रेणी में आती है। इधर, ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भी ग्रहण को मान्यता नहीं दी गई है। मंदिर प्रशासन ने शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा के हवाले से कहा है कि मंदिर में ग्रहण को मान्य नहीं किया जा रहा है। भगवान महाकाल की पूजा अर्चना व आरती के समय में कोई परिवर्तन नहीं होगा। इधर, शासकीय जीवाजी वेधशाला उज्जैन ने भी विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि ऐसे ग्रहणों को सामान्यत: ग्रहण के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है।

ज्योतिषियों का कहना है कि ग्रहण की अलग-अलग श्रेणियां होती है, इनका प्रभाव भी अलग होता है। 10 जनवरी को होने वाली खगोलीय घटना छाया कल्प व मान्द्य ग्रहण की श्रेणी में आती हैं। इस दिन पृथ्वी की छाया से चंद्रमा की कांति कुछ कम होगी, लेकिन धर्मशास्त्र में इस को ग्रहण की मान्य नहीं है। इसलिए आम दिनों की तरह भगवान की पूजा अर्चना करें। भोजन, शयन आदि भी समय पर करें। दरअसल कुछ लोग ग्रहण के धार्मिक पक्षों से पूरी तरह नहीं जानते हैं। इसलिए भ्रम की स्थिति निर्मित कर रहे हैं।

यह बोले ज्योतिष के जानकार

ग्रहण नहीं छाया कल्प

10 जनवरी को रात्रि में होने वाली खगोलीय घटना चंद्र ग्रहण नहीं, बल्कि प्राकृतिक छाया कल्प है। इसमें पृथ्वी की छाया से चंद्रमा की कांति कुछ कम होगी। इसलिए भ्रमित ना हों और नित्य नियम अनुसार दिनचर्या रखें।

- पं.अमर डब्बावाला, ज्योतिषाचार्य

यह ग्रहण की श्रेणी में नहीं आता

शुक्रवार रात होने वाली खगोलीय घटना चंद्र ग्रहण की श्रेणी में नहीं आती है। दरअसल ज्योतिष में इसे मान्द्य ग्रहण कहते हैं। ग्रहण के रूप में इसका कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है। इसलिए भ्रम में नहीं पड़े और दिनचर्या सामान्य रखें। -पं.आनंदशंकर व्यास,ज्योतिर्विद

भ्रामक प्रचार हो रहा

चंद्र ग्रहण को लेकर भ्रामक प्रचार प्रसार किया जा रहा है। यह खगोलीय घटना ग्रहण नहीं है। इसका वैज्ञानिक नाम चंद्र प्रतिछाया है। इसलिए सामान्य दिन की तहर अपने क्रिया कलाप रखें। - पंं.सर्वेश्वर शर्मा, ज्योतिषी

चंद्रमा का प्रकाश कुछ मध्यम हो जाता है

इधर शासकीय जीवाजी वेधशाला उज्जैन की ओर से बताया गया कि 10-11 जनवरी की रात प्रतिछाया चंद्रग्रहण होगा। अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने कहा इस ग्रहण में चंद्रमा का कोई भाग पृथ्वी की वास्तविक छाया से नहीं ढंकता है। बल्कि चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया वाले हिस्से से गुजरता है। इससे उसका प्रकाश कुछ मध्यम हो जाता है। इसलिए प्रतिछाया चंद्रग्रहण को सामान्यत: ग्रहण के रूप में मान्यता नहीं देते हैं।

Posted By: Hemant Upadhyay

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