उज्जैन। माघ मास की गुप्त नवरात्रि 30 साल बाद सूर्य शनि की युति और सूर्य की अभिजीत साक्षी में आ रही है। इस दिन 22 घंटे तक सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग भी रहेगा। ग्रह नक्षत्र की यह स्थिति ध्ार्म आध्यात्म व देवी साध्ाना के लिए श्रेष्ठ है। तीर्थ नगरी उज्जयिनी में गुप्त नवरात्र के इन नौ दिनों में साध्ाक गुप्त साध्ाना करेंगे। शक्तिपीठ हरसिद्धि में प्रतिदिन माता हरसिद्धि का विशेष शृंगार व पूजा अर्चना होगी। परिसर में दीपमालिका भी सजाई जाएगी।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार 24 जनवरी को सुबह 9.54 बजे शनि का मकर राशि तथा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में प्रवेश होगा। यहां पर पहले से ही सूर्य विद्यमान है। शनिवर्ष गणना के आधार पर देखें तो सूर्य व शनि की यह युतिकृत अवस्था 30 वर्ष बाद बन रही है।

एक संयोग यह भी है कि सूर्य का अभिजीत मुहूर्त व नक्षत्र क्रम 21 से 25 जनवरी तक रहेगा। सूर्य का अभिजीत अवस्था में अपने पुत्र शनि के साथ मकर राशि में बैठना दिव्य माना जाता है। वर्षों में यह स्थिति निर्मित होती है। इस दुर्लभ संयोग में माता दुर्गा की गुप्त साधना तथा यंत्र, मंत्र व सात्विक तंत्र की सिद्धि निश्चित शुभफल प्रदान करती है।

उज्जयिनी में साधना करने वालों के लिए यह समय और भी ऊर्वरा माना जाता है। क्योंकि यहां महाकाल व शक्तिपीठ हरसिद्धि के रूप में शक्ति की साक्षी साधना व सिद्धि के लिए अति विशिष्ट मानी गई है।

शनि की अनुकूलता के लिए यह करें

शनि व सूर्य की युति में आ रही गुप्त नवरात्रि में जिन साधकों को शनि की अनुकूलता प्राप्त करना हो, वे शक्ति के बीज मंत्र के साथ शनि के सम्पुट मंत्रों का धार्मिक अनुष्ठान करें। यह करने से जन्म पत्रिका में शनि की अनुकूलता, कुलदेवी की कृपा प्राप्त होती है।

साल में चार नवरात्रि विशेष

वर्षभर में चार नवरात्रि विशेष मानी जाती है। इसमें माघ व आषाढ़ की नवरात्रि गुप्त कहलाती है। चैत्र व अश्विन की नवरात्रि को प्राकट्य नवरात्रि कहा जाता है।

Posted By: Sandeep Chourey

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