Mahakal Lok: ईश्वर शर्मा, उज्जैन। जिस तरह अमृत पाने के लिए देवताओं ने समुद्र मंथन किया था, उसी तरह महाकाल मंदिर के समीप बने नए परिसर के नाम के लिए भी गहन विचार-मंथन किया गया। इस मंथन में साधु-संत, संस्कृतिविद्, विद्वतजन, नईदुनिया अखबार और मध्य प्रदेश सरकार शामिल रही। आठ दिन तक चले इसी विमर्श के अमृत के रूप में 'महाकाल लोक नाम निकलकर आया।

नईदुनिया ने जब नाम रखे जाने की पड़ताल की, तो बहुत दिलचस्प इनसाइड स्टोरी निकलकर सामने आई। इसकी शुरुआत तब हुई, जब अखबारों में नवनिर्मित परिसर के लिए लगातार 'महाकाल कारिडोर शब्द लिखा जा रहा था। उज्जैन के विद्वानों, संस्कृतिविदों व आम जनता को इस नाम में अंग्रेजी का शब्द 'कारिडोर खटक रहा था।

उज्जैन में होने वाली चर्चाओं में इसकी सुगबुगाहट शुरू हुई और यह बात प्रशासन से होते हुए सरकार तक पहुंची कि लोग 'महाकाल कारिडोर नाम से खिन्न हैं। ऐसे में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नवनिर्मित परिसर के लोकार्पण की तिथि (11 अक्टूबर) तय हो गई, तो मुख्यमंत्री श‍िवराज सिंह चौहान 19 सितंबर को नवनिर्मित परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां उन्होंने जनमानस के मन की बात भांपते हुए घोषणा की कि 'कारिडोर शब्द हटाया जाएगा और शास्त्र सम्मत व संस्कृति के अनुरूप नाम रखा जाएगा।

घोषणा होते ही आए तीन दर्जन से अधिक नाम

मुख्यमंत्री ने जैसे ही परिसर का सांस्कृतिक नाम रखने की घोषणा की, उज्जैन के कई विद्वानों ने प्रशासन को नामों के सुझाव भेजे। नईदुनिया विद्वानों की आवाज बना और तीन दर्जन से अधिक नामों में से चुनिंदा श्रेष्ठतम नामों को प्रकाश‍ित कर सरकार तक पहुंचाया। प्रत्येक नाम के पीछे तर्क, तथ्य और शास्त्र के संदर्भ दिए गए। उज्जैन प्रशासन सहित सरकार ने इन नामों का भी संज्ञान लिया। सरकार पर इस बात का दबाव था कि जो भी नाम रखा जाए, उसमें शास्त्रों की श्रेष्ठता, संस्कृति की शालीनता, आस्था का आनंद, भक्ति के गहरे भाव तो हों ही, वह आम जनता के मुंह पर भी आसानी से चढ़ जाए।

मुख्यमंत्री, मंत्री व स्वामी जी तक चला मंथन

नईदुनिया के सूत्र बताते हैं- 'विद्वानों द्वारा सुझाए नामों पर उज्जैन से मंत्री डा. मोहन यादव ने बात आगे बढ़ाई। मुख्यमंत्री शवराज सिंह चौहान तक नाम पहुंचे। फिर जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से अभिमत लिया गया। अन्य संतों और विद्वानों से भी चर्चा की गई। यह पूरी प्रक्रिया आठ दिन तक चली। इस गहन मंथन से नाम निकलकर आया 'महाकाल लोक। अंतत: इस नाम को तय कर दिया गया।

मंत्र भी करते हैं पुष्टि, विद्वान कह उठे साधो

श‍िव की स्तुति का एक प्रसिद्ध मंत्र है -

आकाशे तारकेलिंगम्, पाताले हाटकेश्वरम्

मृत्युलोके महाकालम्, त्रयलिंगम् नमोस्तुते।।

इस मंत्र का अर्थ है कि आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग और पृथ्वी लोक पर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा अपार है। महाकाल को मृत्युलोक का अधिपति भी माना जाता है। इस दृष्टि से नवनिर्मित परिसर के नामकरण 'महाकाल लोक की पुष्टि मंत्रों से भी होती है। वहीं विद्वानों, संस्कृतिविदों व आम जनता ने भी 'महाकाल लोक नाम को श्रेष्ठ बताया है। इंटरनेट मीडिया पर भी इस नाम को लेकर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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