उज्जैन। नईदुनिया प्रतिनिधि। कार्तिक-अगहन मास में सोमवार को भगवान महाकाल की दूसरी सवारी निकली। रजत पालकी में सवार भगवान महाकाल के मनमहेश रूप के दर्शन कर भक्त अभिभूत हो गए। परंपरागत पूजन के पश्चात शाम 4 बजे शाही ठाठ-बाट के साथ महाकाल मंदिर से राजा की सवारी निकली। महाकाल की सवारी में बड़ी संख्‍या में श्रद्धालु शामिल हुए। सवारी के लिए उज्‍जैन और आसपास के जिलों के श्रद्धालु एक दिन पहले ही शहर पहुंच जाते हैं।

पुजारियों ने शिप्रा जल से भगवान महाकाल का अभिषेक कर पूजन किया

भगवान महाकाल की सवारी अपने निर्धारित मार्गों से होते हुए 40 मिनट में शाम 4.40 पर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के रामघाट पहुंची। यहां पुजारियों ने शिप्रा जल से भगवान महाकाल का अभिषेक कर पूजन किया। आरती के पश्चात पालकी गणगौर दरवाजा होते हुए महाकाल मंदिर पहुंची।

भगवान महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त उमड़े

वैकुंठ चतुर्दशी के संयोग में निकली भगवान महाकाल की सवारी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त उमड़े। पुलिस का अश्वरोही दल, सशस्त्र बल की टुकड़ी, भजन मंडली और महाकाल सेना व भस्म रमैया भक्त मंडल का झांझ डमरू दल राजा की शाही शान का गुणगान करते चल रहा था।

शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी भगवान महाकाल की सवारी

महाकाल मंदिर से शुरू होकर सवारी महाकाल घाटी, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए शिप्रा तट पहुंची। पूजन पश्चात सवारी रणौजी की छत्री घाट होते हुए गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबारोड, टंकी चौराहा, छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए पुन: महाकाल मंदिर पहुंची। इसके बाद महाकाल मंदिर में नित्य होने वाली संध्या आरती हुई।

Posted By: Hemant Upadhyay