Mahakal Savari : उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिध‍ि)। भादौ मास में सोमवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित भगवान महाकाल की पहली सवारी निकलेगी। श्रावण-भादौ मास के क्रम में यह भगवान महाकाल की छठी सवारी है। इसके बाद 17 अगस्त को शाही सवारी निकाली जाएगी। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के सभा मंडप में परंपरा अनुसार कलेक्टर आशीष सिंह भगवान महाकाल के मनमहेश रूप का पूजन कर पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना करेंगे।

शाम चार बजे शाही ठाठबाट के साथ अवंतिकानाथ का नगर भ्रमण शुरू होगा। भगवान महाकाल चांदी की पालकी में मनमहेश व हाथी पर चंद्रमौलेश्वर रूप में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे। बड़ा गणेश, हरसिद्घि चौराहा, सिद्घ आश्रम के सामने से होते हुए सवारी मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पहुंचेगी। यहां महाकाल पेढ़ी पर पुजारी भगवान महाकाल का शिप्रा जल से अभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे। पूजन पश्चात सवारी हरसिद्घि की पाल होते हुए शक्तिपीठ हरसिद्घि मंदिर मंदिर के सामने से पुन महाकाल मंदिर पहुंचेगी।

शाही सवारी में हो सकता है हरि-हर मिलन

17 अगस्त को निकलने वाली शाही सवारी में गोपाल मंदिर पर हरि-हर मिलन हो सकता है। रविवार को हुई आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में जनप्रतिनिध‍ियों ने शाही सवारी को परंपरागत मार्ग से निकालने की मांग की है। मंदिर प्रशासक सुजानसिंह रावत का कहना है कि सवारी को गोपाल मंदिर के सामने से निकाले जाने पर विचार किया जा रहा है।

यह है हरि-हर मिलन

श्रावण-भादौ मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारी हर वर्ष गोपाल मंदिर के सामने से होकर गुजरती है। गोपाल मंदिर के मुख्य द्वार पर पुजारी भगवान महाकाल की पूजा अर्चना करते हैं। इसे हरि-हर मिलन कहा जाता है। बता दें इस बार कोरोना संक्रमण के चलते महाकाल की सवारी नए मार्ग से निकाली जा रही है। ऐसे में बीती पांच सवारियों में हरि और हर का मिलन नहीं हो पाया है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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