Mahakal Savari : उज्जैन। श्रावण मास में सोमवार को भगवान महाकाल की तीसरी सवारी निकली। मंदिर प्रशासन ने पहली बार सवारी में भगवान के शिवतांडव स्वरूप को शामिल नहीं किया। भक्तों को पालकी में विराजित भगवान मनमहेश व हाथी पर विराजित चंद्रमौलेश्वर के दर्शन हुए।

भगवान का शिवतांडव स्वरूप गरुड़ रथ पर विराजित होकर निकलता है। सूत्रों के अनुसार ट्रॉयल के दौरान गरुड़ रथ को खींचने वाले बैल सवारी मार्ग पर ठीक से घाटी नहीं चढ़ पा रहे थे।

रथ को आगे ले जाने के लिए कहारों को इंतजाम किया गया, मगर फिर भीड़ अधिक होने की आशंका के कारण शिवतांडव रूप को नहीं निकाला गया। मंदिर प्रशासक सुजानसिंह रावत ने बताया कि भीड़ नियंत्रण की दृष्टि से एनवक्त पर निर्णय में बदलाव किया गया है।

महाकाल मंदिर से शाम चार बजे शाही ठाठबाट के साथ राजा की सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई । यह सवारी शिप्रा के रामघाट पहुंची। पालकी में सवार भगवान महाकाल प्रजा का हालचाल जानने निकले हैं। आरंभ में ही जय महाकाल से मंदिर परिसर गूंज उठा।

रामघाट पर पुजारी ने भगवान का शिप्रा जल से अभिषेक-पूजन किया। पूजन के बाद सवारी रामानुजकोट, हरसिद्धि मंदिर के सामने से बड़ा गणेश होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंची। परिवर्तित मार्ग अनुसार भगवान महाकालेश्वर की सवारी महाकाल मन्दिर से बड़ा गणेश मन्दिर होते हुए हरसिद्धि मन्दिर चौराहा और यहां से झालरिया मठ और बालमुकुंद आश्रम होते हुए सवारी रामघाट पर पहुंची।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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Raksha Bandhan 2020
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