Mahakal Sawari 2021: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर की तीसरी सवारी सोमवार को धूमधाम से निकली। कोरोना के प्रतिबंध हटने के बाद जब यह सवारी दो साल बाद अपने परंपरागत मार्ग से निकली तो श्रद्धालुओंं का सैलाब भगवान महाकाल की एक झलक पाने को उमड़ पड़ा। चारों ओर जिधर नजर जा रही थी श्रद्धालु पालकी का दर्शन करने को बेताब नजर आ रहे थे।

राजसी ठाठ से रजत पालकी में विराजित चंद्रमौलेश्वर के हजारों भक्तों ने दर्शन किए। कई मंचों से सवारी का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। आरती उतारी गई। परंपरागत मार्ग से महाकाल की अंतिम सवारी 25 नवंबर 2019 को निकली थी।

इसके बाद कोरोना लहर घातक होने से प्रशासन ने एहतियात स्वरूप लगातार साल-2020 और 2021 में श्रावण-भादौ मास की सवारी परिवर्तित मार्ग (महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, सिद्ध आश्रम होकर रामघाट) से निकाली। कार्तिक-अगहन मास की पिछली दो सवारियां भी परिवर्तित मार्ग से ही निकाली गईं।

चार दिन पहले शासन द्वारा कोरोना प्रतिबंध हटाए जाने के बाद स्थानीय प्रशासन ने निर्णय लिया कि कार्तिक-अगहन (मार्गशीर्ष) मास की तीसरी और मार्गशीर्ष मास की पहली सवारी सोमवार को परंपरागत मार्ग से निकलेगी।

श्रावण-भादौ और कार्तिक-अगहन मास के प्रत्येक सोमवार को भगवान महाकाल की सवारी निकालने की परंपरा वर्षों पुरानी है। परंपरागत महाकाल सवारी मार्ग करीब सात किलोमीटर लंबा है। इस मार्ग पर प्रमुख बाजार और सघन रहवासी क्षेत्र है। भीड़ नियंत्रण की दृष्टि से यह मार्ग उचित नहीं था, इसलिए नए परिवर्तित मार्ग से सवारी निकालने का निर्णय लिया था।

उल्‍लेखनीय है कि श्रावण-भादौ मास और कार्तिक-अगहन मास की पिछली सवारियां कोविड-19 गाइडलाइन की वजह से परिवर्तित मार्ग महाकाल मंदिर से बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर, सिद्ध आश्रम होकर निकाली गई थी।अब कोविड-19 संबंधी सारे प्रतिबंध समाप्त करने के बाद महाकालेश्वर की सवारी आज पूरे राजसी ठाठ-बाठ के साथ परंपरागत मार्ग से निकाली गई।

शाम चार बजे महाकाल मंदिर के सभामंडप में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में भगवान महाकाल का विधिवत पूजन किया गया। पूजन के बाद भगवान को रजत पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया गया। सवारी मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी के रास्ते रामघाट पहुंची।

रामघााट पर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के जल से राजाधिराज का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद सवारी गणगौर दरवाजा, मोढ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती का मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी बाजार, होकर पुन: महाकाल मंदिर पहुंची। सवारी में आगे तोपची, कडाबीन, पुलिस बैंड, घुडसवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान नगरवासियों को राजाधिराज के आगमन की सूचना देते चल रहे थे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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