उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में व्यवस्थाओं के निर्धारण के लिए मंदिर समिति को देश के अन्य मंदिरों का अवलोकन करने के बजाय स्वयं योजना बनाना चाहिए। पृथ्वी के नाभि केंद्र पर स्थित दक्षिण मुखी ज्योतिर्लिंग का महत्व व मंदिर की संरचना अलग है। किसी अन्य मंदिर को देखकर यहां व्यवस्था जुटाना उचित नहीं है। अगर मंदिर प्रबंध समिति यह नहीं कर सकती है, तो व्यवस्था महाकाल सेना को सौंप दें। हम सुगम दर्शन के साथ नाम मात्र के शुल्क पर दर्शनार्थियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराएंगे। महाकाल सेना धर्म प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रमुख महेंद्रसिंह बैस ने इस आशय का पत्र गुरुवार को जिले के प्रभारी मंत्री सज्जनसिंह वर्मा को लिखा है। अफसर अर्थप्रधान व्यवस्था पर जोर दे रहे हैं। हाल ही में मंदिर समिति का दल तिरुपति बालाजी मंदिर की व्यवस्थाओं का देखने गया था। अफसर वहां की व्यवस्थाओं को यहां लागू करने के पक्षधर हैं। लेकिन व्यावहारिक रूप से ये संभव नहीं। शासन प्रशासन को किसी अन्य मंदिर की व्यवस्थाओं का अवलोकन की बजाए, महाकाल मंदिर की परंपरा, यहां आने वाले भक्तों की संख्या तथा भौगोलिक स्थिति के अनुसार व्यवस्थाओं का निर्धारण करना चाहिए।

उत्सव महाकालेश्वर का आयोजन 20 अक्टूबर को

मधुवन संस्था द्वारा भारतीय सनातन सांस्कृतिक मंदिर महोत्सव परंपरा पर एकाग्र 'उत्सव महाकालेश्वर" का रजत जयंती समारोह रविवार शाम 6.30 बजे श्री महाकाल प्रवचन हॉल में होगा। उत्सव संयोजक पं. श्रीधर व्यास ने बताया कि मुख्य अतिथि भजन गायक अनूप जलोटा रहेंगे। संगीत नृत्य महोत्सव में डॉ. संतोष देसाई, कीर्ति सूद, प्रकाश पारनेरकर एवं श्री हरि संगीत कला केंद्र के नर्तकवृंद प्रस्तुतियां देंगे।

Posted By: Prashant Pandey