उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Mahakal Temple मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित भगवान महाकाल की भस्मारती को लेकर सोशल मीडिया पर एक ग्रुप द्वारा भ्रामक प्रचार किया जा रहा था। इससे लोगों में गलत संदेश जा रहा था। मामला मंदिर प्रशासन तक पहुंचा तो प्रशासक सुजानसिंह रावत ने वाट्सएप तथा फेसबुक पेज की पड़ताल की। जांच में मामला सही पाया गया। इसके बाद फेसबुक पेज के एडमिन रूपेश ठाकुर के खिलाफ महाकाल थाने में शिकायत की गई है। पुलिस ने ठाकुर सहित एक अन्य मोबाइल धारक के खिलाफ केस दर्ज किया है।

मंदिर प्रशासक रावत ने बताया कि मंगलवार को एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक पुजारी भस्मारती के समय लाउड स्पीकर हटाने का विरोध कर रहा है। वीडियो में एक अखबार की पेपर कटिंग भी नजर आ रही है। ग्रुप ने मामले में एक लेख भी वायरल किया, जिसमें घटना को काला दिन बताया गया। साथ ही एक वर्ग के लोगों से इसका विरोध करने की अपील की गई। वीडियो वायरल होते ही उज्जैन में हड़कंप मच गया।

सैकड़ों लोग मंदिर में फोन कर घटना की पुष्टि करने लगे। मामले में मंदिर प्रशासन ने जांच कराई, तो असलीयत का पता चला। दरअसल, उक्त वीडियो आष्टा तहसील का है। महाकाल मंदिर से इसका कोई भी लेना देना नहीं है। सोशल मीडिया पर इसे महाकाल मंदिर से जोड़कर भ्रामक प्रचार कर दिया। इससे गफलत की स्थिति बनी और भक्त परेशान होते रहे। यह मामला आईटी एक्ट का उल्लंघन है।

इस पर प्रशासक ने फेसबुक पेज के एडमिन रूपेश ठाकुर के खिलाफ शिकायती आवेदन दिया था। एक अन्य वाट्सएप ग्रुप भी इसी तरह से भ्रामक खबर चल रही थी। एसआई गगन बादल ने बताया कि रूपेश व एक मोबाइल धारक के खिलाफ धारा 188 के तहत केस दर्ज किया है।

मंदिर के शिखर पर लगे हैं लाऊड स्पीकर

महाकाल मंदिर के शिखर पर लाऊड स्पीकर लगे हुए हैं। तड़के 4 बजे भस्मारती से रात 10.30 बजे तक होने वाली मंदिर की पांचों आरती के समय लाउड स्पीकर चालू रहते हैं। इस व्यवस्था से मंदिर के आसपास दूर-दूर तक भक्तों को मंदिर की आरती और मंत्रोच्चार सुनाई देते हैं। यह परंपरा सालों से चली आ रही है। वायरल वीडियो में इन्हीं लाऊड स्पीकर के साथ छेड़छाड़ करने का भ्रामक प्रचार किया जा रहा था।

Posted By: Hemant Upadhyay

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