Mahakal Temple Ujjain: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। महाकाल मंदिर में पुजारी व कर्मचारी अब भक्तों द्वारा लाया गया जल भगवान को अर्पित नहीं करेंगे। मंदिर प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी है। कोरोना संक्रमण के चलते पहले से ही समिति ने भक्तों द्वारा भगवान के जलाभिषेक पर रोक लगा रखी है। व्यवस्था से जुड़े कुछ पुजारी व कर्मचारी भेंट दक्षिणा के लालच में भक्तों द्वारा लाया गया जल भगवान को अर्पित कर रहे थे। मामला संज्ञान में आने के बाद प्रशासक ने इस पर रोक लगा दी है। हाल ही में कुछ दर्शनार्थियों ने मंदिर कार्यालय में शिकायत की थी कि प्रथम बैरिकैड्स से दर्शन करने वाले वीआइपी श्रद्धालु भगवान को जल अर्पित करते हैं। उनके द्वारा लाया गया जल पुजारी व कर्मचारी गर्भगृह में ले जाकर भगवान को अर्पित करते हैं। लेकिन वे तीसरे व चौथे बैरिकैड्स से दर्शन करते हैं, इसलिए भगवान को जल अर्पित नहीं कर पा रहे हैं। पीछे खड़े होने के कारण पुजारी व कर्मचारी हमारा जल भगवान को नहीं चढ़ापाते हैं, इसलिए हमें प्रथम बैरिकेड्स से दर्शन की अनुमति दी जाए। मामला संज्ञान में आते ही मंदिर प्रशासन हरकत में आ गया।

प्रशासक बोले, गलत है

प्रशासक गणेशकुमार धाकड़ ने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर में भक्तों के भगवान का जलाभिषेक करने पर रोक लगी हुई है। अगर कुछ पुजारी व कर्मचारी भक्तों के जल को भगवान को अर्पित कर रहे हैं, तो गलत है। इसके बाद उन्होंने आदेश जारी कर पुजारी व कर्मचारियों को किसी भी भक्त की ओर से जल नहीं चढ़ाने के निर्देश दिए।

सशुल्क रसीद से हटेगा भगवान महाकाल का चित्र

मंदिर समिति द्वारा हाल ही में प्रोटोकाल दर्शन के लिए 100 रुपये तथा भस्मारती के लिए 200 रुपये शुल्क निर्धारित किया है। इन दोनों रसीद पर भगवान महाकाल का चित्र अंकित है। मामले में पूर्व समिति सदस्य पं.महेश पुजारी ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि उपयोग के बाद श्रद्धालु रसीद को इधर उधर फेंक देते हैं। यह भगवान का अपमान है, इस पर मंदिर समिति ने रसीद से चित्र हटाने का निर्णय लिया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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