उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए मंदिर समिति ने एक और कदम उठाया है। क्षरण रोकने के लिए अब शिवलिंग पर कपड़ा ओढ़ाकर सर्पकर्ण व मुंडमाला धारण कराया जा रहा है। हाल ही में भगवान के श्रृंगार में उपयोग होने वाले चांदी के इन आभूषणों का कुल वजन भी वजन 12 किलो के स्थान पर छह किलो कर दिया गया है। समिति द्वारा उठाए जा रहे कदम की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को भेजी गई है।

उज्जैन निवासी सारिका गुरु की याचिका पर ज्योतिर्लिंग क्षरण का मामला 2017 से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर क्षरण रोकने के उपाय बताने को कहा था। विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की थी। इसके बाद 1 सितंबर 2020 को मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को क्षरण रोकने के लिए कई निर्देश दिए थे। इसमें भगवान को धारण कराई जाने वाली चांदी की मुंडमाला तथा सर्पकर्ण का वजन कम करने को भी कहा गया था।

सुझाव के लिए गठित की समिति

इसके बाद मंदिर समिति ने मामले में धर्म सम्यक व मंदिर की गरिमा अनुसार सुझाव देने के लिए पुजारी,पुरोहित व अधिकारियों की 7 समिति गठित कर दी थी। समिति ने मंदिर प्रशासन को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। समिति के सुझाव अनुसार मंदिर प्रशासन ने मुंडमाला, सर्पकर्ण व रजत मुकुट का वजन कम कर दिया है। साथ ही श्रृंगार के समय भगवान को रजत आभूषण धारण कराने से पहले शिवलिंग पर मोटा कपड़ा ओढ़ाया जा रहा है, ताकि आभूषण के घर्षण से ज्योतिर्लिंग का क्षरण ना हो।

समिति के सुझाव- अफसरों ने उठाए यह कदम

यह सुुझाव :मंदिर प्रबंध समिति द्वारा गठित पुजारी, पुरोहित की समिति ने मंदिर प्रशासन को सुझाव दिया कि मुंडमाला व सर्पकर्ण का वजन कम कर दिया जाए। इसके लिए मुंडमाला में मुंड की संख्या भी कम की जा सकती है।

यह कदम : मंदिर समिति ने सुझाव के बाद आभूषण का वजन कम कर दिया। पहले मुंडमाल, रजत मुकुट व सर्पकर्ण का कुल वजन करीब 12 किलो था। इसे घटाकर 6 किलो कर दिया गया है।

सुुझाव : भगवान महाकाल को रजत आभूषण धारण कराने से पहले शिवलिंग पर पीछे की ओर से मोटा कपड़ा ओढ़ाया जाए। इससे घर्षण नहीं होगा तथा क्षरण रुकेगा।

यह कदम : मंदिर समिति ने श्रृंगार से पहले भगवान को मोटा कपड़ा ओढ़ाने की शुरुआत करा दी है। सुबह और संध्या में आरतियों के समय श्रृंगार से पहले शिवलिंग पर कपड़ा ओढ़ाने के बाद आभूषण धारण कराए जा रहे हैं।

यह सुझाव : समिति ने सुझाव दिया कि अगर रजत आभूषण का वजन कम करना है तो मुंडमाला में मुंड की संख्या कम की जा सकती है।

यह कदम : समिति ने माला में से मुंड की संख्या कम कर दी है। बताया जाता है पहले माला में 9 मुंड थे। अब केवल मुंड की माला बनवाई गई है। शिवलिंग से मुंडमाला का घर्षण ना हो, इसके लिए मुंड को शिवलिंग से दूर रखा जाता है।

समिति ने अब तक उठाए यह कदम

-भगवान के अभिषेक के लिए मंदिर समिति भक्तों को आरओ जल उपलब्ध करा रही है।

-भगवान के पंचामृत अभिषेक पर रोक लगाई गई है। केवर पुजारी ही पंचामृत अभिषेक करते हैं।

-भस्म चढ़ाते वक्त ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंका जा रहा है।

-गर्भगृह में होने वाली विभिन्ना पूजा की रिकार्डिंग कराई जा रही है। इसे समय-समय पर कोर्ट में प्रस्तुति किया जाएगा।

-भक्तों को शुद्ध दूध अपलब्ध कराने के लिए मंदिर समिति सांची दुग्ध संघ के सहयोग से मंदिर में कियोस्क स्थापित करने जा रही है।

जनवरी के दूसरे सप्ताह में समीक्षा

1 सितंबर को अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह मामले में समीक्षा जारी रखेगी। मंदिर समिति निर्देशों के पालन के संबंध में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। जनवरी 2021 के दूसरे सप्ताह में कोर्ट इसकी सुनवाई कर सकती है।

समिति में यह शामिल

मंदिर समिति द्वारा गठित सात सदस्यीय समिति में पं. महेश पुजारी,पं.राजेश पुजारी, शासकीय पुजारी पं.घनश्याम शर्मा, पं.राधेश्याम शास्त्री, पं.अशोक शर्मा, मंदिर के विधि सलाहकार आरपी तिवारी तथा जौहरी अशोक जड़िया शामिल है।

कपड़ा ओढ़ाकर पहना रहे आभूषण

समिति ने जो सुझाव दिए थे, उसके अनुसार शिवलिंग पर मोटा कपड़ा ओढ़ाकर मुंडमाला, सर्पकर्ण आदि चांदी के आभूषण धारण कराए जा रहे हैं। इसकी रिपोर्ट न्यायालय को भी सौंपी गई है।

-मूलचंद जूनवाल, सहायक प्रशासक महाकाल मंदिर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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