उज्जैन। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में जल्द ही सिंहस्थ महापर्व की तर्ज पर भस्मारती में चलायमान दर्शन व्यवस्था लागू होगी। नई व्यवस्था में दर्शनार्थियों को भस्मारती दर्शन के लिए सीधे मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। सूत्र बताते हैं मंदिर प्रशासन यह कदम भ्रष्टाचार व फिजूलखर्ची को रोकने के लिए उठाया है।

महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के 4 बजे भगवान महाकाल की भस्मारती होती है। मंदिर प्रशासन इसके लिए प्रतिदिन करीब 1700 लोगों को दर्शन अनुमति जारी करता है। मंदिर के काउंटर से भक्तों को नि:शुल्क अनुमति दी जाती है। जबकि ऑनलाइन अनुमति कराने पर प्रति व्यक्ति 100 रुपए शुल्क देना होता है। समिति प्रतिदिन 400 ऑनलाइन अनुमति जारी करती है। शेष 1300 अनुमति ऑफलाइन दी जाती है। हालांकि भस्मारती में अनुमति की बाध्यता हमेशा से विवादों में रही है।

दलाल लोगों से भस्मारती अनुमति के नाम पर मोटी रकम लेते हैं। चार दिन पहले ही एक व्यक्ति ने दिल्ली के 8 श्रद्धालुओं से दर्शन अनुमति दिलाने के नाम पर 5600 रुपए लिए थे। लाख प्रयास के बावजूद मंदिर समिति भ्रष्टाचार पर रोक नहीं लगा पाई है। ऐसे में अफसरों ने चलायमान दर्शन व्यवस्था का प्लान तैयार किया है। इससे मंदिर समिति को भस्मारती अनुमति व्यवस्था में लगे संसाधनों पर खर्च हो रहे लाखों रुपए की बचत होगी। साथ ही देश विदेश से आने वाले लोगों को सुविधा से मंदिर में प्रवेश मिलेगा।

सिंहस्थ में लाखों श्रद्धालुओं ने किए थे दर्शन

सिंहस्थ 2016 के दौरान भी मंदिर में भस्मारती के दौरान यह व्यवस्था थी। इसमें श्रद्धालुओं को सीधे मंदिर में प्रवेश दिया जाता था। दर्शन कर श्रद्धालु बाहर आ जाते थे। वर्तमान में 1700 लोग करीब दो घंटे बैठकर भस्मारती दर्शन करते हैं। केवल अनुमति पास धारकों को ही प्रवेश दिया जाता है।

Posted By: Prashant Pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

Independence Day
Independence Day