उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के गौरवशाली इतिहास की खोज फिर से शुरू हो गई है। करीब एक पखवाड़े बाद पुरातत्व विभाग ने रविवार को एक बार फिर खोदाई का काम शुरू कर दिया है। विभाग के शोध अधिकारी के निर्देशन में श्रमिक कुशलता पूर्वक खोदाई करने लगे हैं। पुराविदों के अनुसार खोदाई में नए रहस्य उद्घाटित हो सकते हैं। जिस स्थान पर खोदाई चल रही है उसके दूसरे हिस्से में नवनिर्माण किया जा रहा है। हालांकि पुराविदों की नजर संपूर्ण परिक्षेत्र में है। बताया जाता है कि पुरासंपदा का भंडार स्थान विशेष पर नहीं है। इसकी संभावाना परिक्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी हो सकती है। फिलहाल जिस स्थान पर खोदाई की जा रही है, वहां नई संभावना को खोचने के लिए आगे का काम शुरू किया गया है। बता दें पुरातत्व विभाग ने शोध अधिकारी डा.ध्रुवेंद्रसिंह जोधा को खोदाई का जिम्मा सौंपा है। अब तक इस स्थल से एक हजार साल पुराने मंदिर का आधार भाग, शिव परिवार की प्राचीन मूर्तियां, शिवलिंग, स्थापत्य खंड आदि पुरासंपदा प्राप्त हो चुकी है। परमारकालीन प्राचीन मंदिर के आसपास ब्लैक बेसाल्ट का परिक्रमा पथ भी दिखाई दे रहा है।

डा. चित्ररेखा ने पाया राज्य शिक्षक पुरस्कार

उज्जैन । यहां के शासकीय हाईस्कूल मोहनपुरा में पदस्थ प्राचार्य डा. चित्ररेखा जैन ने राष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से राज्य शिक्षक पुरस्कार पाया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें अपर कलेक्टर अंकिता धाकरे, संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण उज्जैन आरके सिंह, डाइट के प्राचार्य सुरेश द्विवेदी और एडीपीसी गिरीश तिवारी के हाथों 25 हजार रुपये का चेक, प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम बृहस्पति भवन के एनआईसी कक्ष में हुआ था। शिक्षक संजय लालवानी, डा. पुष्पेंद्र जैन उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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