उज्जैन। संदेह और अहंकार मनुष्य को समाप्त कर देता है। सज्जनों पर कभी संदेह नहीं करना चाहिए। पति से कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। स्त्री के लिए सबसे बड़ा पति धर्म होता है। यह बात श्री श्री उत्तम सेवा धाम में आयोजित राम कथा में बुधवार को उत्तम स्वामीजी ने कही।

उन्होंने शिव-सती प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बार भगवान शिव और सती जंगल में भ्रमण करने जा रहे थे। इस दौरान उन्हें भगवान श्रीराम मिले जो उस समय सीता को खोज रहे थे। शिव ने भगवान राम को पहचान लिया और उनके हाथ जोड़कर खड़े हो गए।

इस पर सती ने कहा कि आप इस तरह इस साध्ाारण मानव के सामने क्यों खड़े हैं। तब शिवजी ने कहा कि ये साधारण मानव नहीं परमात्मा है। इस पर सती ने भगवान राम की परीक्षा लेना चाही और माता सीता का रूप धरकर उनके सामने पहुंचीं। भगवान श्रीराम ने सती को पहचान लिया। राम ने उनसे पूछा मेरे भोलेनाथ कहा हैं। इस पर सती का अहंकार नष्ट हो गया।

जो हैं वैसा दिखने का प्रयास करें

स्वामीजी ने कहा आप जो हो वैसा दिखने का प्रयास करें। जबरन किसी चीज को दिखाने का प्रयास न करें। चेहरे व अंतरंग के भाव जैसे हैं वैसे ही रहते हैं। आप स्वरूप को कभी नहीं बदल सकते हैं। इसलिए जैसे आप अंदर से हैं वैसे ही दिखने का प्रयास करें। किसी के जैसा बनने का प्रयास नहीं करना चाहिए। जैसे हैं वैसा ही रहे तो परमात्मा की प्राप्ति हो जाएगी। ईश्वर के चरणों में अगर निकटता प्राप्त करनी है तो ह्दय को ठीक रखो।