Nag Panchami 2020 : राजेश वर्मा उज्जैन (नईदुनिया)। महाकाल मंदिर में नागपंचमी पर पहली बार भगवान नागंचद्रेश्वर के दर्शन के लिए भक्तों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परिसर में लगी एलईडी, महाकाल एप और कुछ चैनलों पर लाइव दर्शन कराए जाएंगे। कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। 300 साल के इतिहास में पहला मौका होगा जब भक्तों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

मंदिर प्रशासक सुजानसिंह रावत ने बताया कि ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के शिखर पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में एक बार नागपंचमी पर भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस बार भी 24 जुलाई की मध्यरात्रि रात 12 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीतगिरिजी महाराज के सान्निाध्य में जिले के आला अधिकारी भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा करेंगे। कोरोना संक्रमण के चलते भक्तों को मंदिर में प्रवेश नहीं देने का निर्णय लिया गया है। स्थानीय के साथ देश-विदेश के लाखों भक्त सीधे प्रसारण के माध्यम से भगवान के दर्शन कर सकेंगे।

त्रिकाल पूजा होगी

नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की जाती है। पहली पूजा 24 जुलाई की रात 12 बजे होगी। दूसरी 25 जुलाई की दोहपर 12 बजे शासन की ओर से होगी। तीसरी पूजा मंदिर समिति की ओर से 25 जुलाई की शाम 7.30 बजे के बाद होगी। इसके बाद रात्रि 12 बजे पुनः एक वर्ष के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।

11वीं शताब्दी की है मूर्ति

नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर जिस मूर्ति के दर्शन होते हैं, वह 11वीं शताब्दी की परमारकालीन मूर्ति बताई जाती है। इसमें शिव-पार्वती के शीश पर छत्र रूप में फन फैलाए नाग देवता के दर्शन होते हैं। बताया जाता है यह मूर्ति नेपाल से यहां लाई गई है। मंदिर के दूसरे भाग में भगवान नागचंद्रेश्वर शिवलिंग रूप में विराजित हैं।

300 साल से अधिक पुरानी परंपरा

ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया कि करीब 300 साल पहले सिंधिया राजवंश ने महाकाल मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। इसके बाद से ही मंदिर में उत्सव आदि परंपराओं की शुरुआत मानी जाती है। भगवान महाकाल की विभिन्न सवारी और नागपंचमी पर नागचंद्रेश्वर मंदिर में साल में एक बार भक्तों के प्रवेश की परंपरा भी इन्हीं में से एक है। कालांतर में प्रतिवर्ष हजारों भक्त भगवान नगाचंद्रेश्वर के दर्शन करने आते रहे हैं। श्रावण मास में प्रतिदिन 8 से 10 हजार भक्तों को समिति भगवान महाकाल के दर्शन करा रही है। जिस व्यवस्था से भक्तों को भगवान महाकाल के दर्शन कराए जा रहे हैं, उसी व्यवस्था से भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन भी कराए जा सकते थे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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