उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भवन निर्माण अनुज्ञा जारी करने के बाद उसे निरस्त करने की उज्जैन नगर निगम में परंपरा सी बन गई है। जानकारों का कहना है कि अनुज्ञा जारी करने में जमकर धांधली हो रही है। एक के बाद एक अनुज्ञा जारी करने के बाद उसे निरस्त करने की यहां परंपरा सी बनती जा रही है।

हाल में राकेश, संजय, मनीष कोठारी ब्रदर्स को मिली अनुज्ञा निरस्त की गई है। नगर निगम का कहना है कि कोठारी ब्रदर्स ने मेन आगर रोड पर चिमनगंज मंडी रोटरी के पास प्लाट नंबर 69/17 पर काम्प्लेक्स बनाने के लिए कोठारी ब्रदर्स ने महत्वपूर्ण तथ्य छुपाकर भवन निर्माण अनुज्ञा प्राप्त कर ली थी। जांच में पाया कि जिस प्लाट के लिए भवन निर्माण अनुज्ञा चाही, हकीकत में उस प्लाट की रजिस्ट्री की कापी निगम को उपलब्ध ही नहीं कराई।

पहले भी आ चुके मामले

- उज्जैन नगर निगम ने इंदौर रोड स्थित कृषि भूमि पर होटल शांति पैलेस निर्माण की भवन निर्माण अनुज्ञा साल-2013 में जारी की थी। इसे कुछ साल पहले निरस्त कर जमीन पर तने 20 करोड़ रुपये के होटल को बारूद लगाकर धराशायी कर दिया था। इस केस में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा, सहायक यंत्री जीके जायसवाल और उपयंत्री श्याम शर्मा को आरोपी बनाया गया था। मगर कार्रवाई नहीं हुई। जबकि हाईकोर्ट ने गलत रूप से भवन निर्माण अनुज्ञा जारी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई करने का आदेश जारी किया था। जानकारों का कहना है कि शासन ठीक से जांच करता तो भूमि डायवर्शन और विकास की अनुमति देने वाले तत्कालीन एसडीएम, आवासीय प्लाट का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए रजिस्ट्री करने वाले फर्म एंड सोसायटी के उपपंजीयक और निगम के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती थी। होटल, जिस जमीन पर तना था वो आदर्श विक्रम गृह निर्माण सहकारी संस्था, नमन गृह निर्माण सहकारी संस्था और अंजली गृह निर्माण सहकारी संस्था की थी। इन संस्था के अध्यक्षों से सहकारिता उपायुक्त ओपी गुप्ता ने पूछा था कि उन्होंने नियमों को ताक में रखकर प्लाट क्यों बेचे। लोकायुक्त से केस का खात्मा होने के बाद प्रकरण आर्थिक अपराध शाखा (इओडब्ल्यू) में विचाराधीन है।

- दो महीने पहले यहां के कालोनाइजर महेश पलोड़ की देवास रोड पर बनाई जा रही मल्टी की भवन निर्माण अनुज्ञा नगर निगम ने स्वीकृति के बाद निरस्त कर दी थी। निरस्ती पत्र में उल्लेख किया था कि भूमि शासकीय दर्ज है। भूमि के संबंध में जो शिकायत प्राप्त हुई थी, उसके समाधान में जो दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, वह गलत थे। पालोड़ ब्रदर्स ने आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों में नजूल अनापत्ति प्रमाण पत्र संबंधी सही जानकारी छुपाकर गलत जानकारी प्रस्तुत की थी। इसलिए 19 फरवरी 2020 को भवन निर्माण के लिए दी अनुमति निरस्त की जाती है। मल्टी का निर्माण देवास रोड पर नगर निगम के फूडकोर्ट के सामने 2971 वर्ग मीटर भूमि पर किया जा रहा था। हालांकि पलोड़ का दावा है कि जमीन उनकी निजी है, जो उन्होंने राहुल तेजनकर से दो साल पहले 3 करोड़ 72 लाख रुपये में खरीदी थी।

सांसद, विधायक और संभागायुक्त को लिखा पत्र

सिंहस्थ क्षेत्र में जिन अफसरों ने पक्के निर्माण होने दिए, उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग नगर निगम के पूर्व जोन अध्यक्ष और अभिभाषक शिवेंद्र तिवारी ने उठाई है। कार्रवाई के लिए सांसद, विधायक और संभागायुक्त सह नगर निगम प्रशासक को पत्र लिखा है। कहा है कि नगर निगम अधिनियम-1956 में अवैध कालोनी निर्माण के विरूद्ध कार्रवाई न करने के लिए अफसरों को दंडित करने का प्रविधान है। धारा 292-छ में साफ लिखा है कि आयुक्त के अधिन अधिकारी अवैध निर्माण रोकने, रिपोर्ट देने, कार्रवाई करने में चूक करता है तो वह तीन वर्ष तक के कारावास या 10 हजार रुपये के जुर्माने या दोनों सजा से दंडित किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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