राजेश वर्मा

आस्था की यात्राः पुराविदों को मिले थे सैकड़ों साल पुराने अवशेष, हर कालखंड में यात्री यहां से गुजरते रहे

उज्जैन। आस्था की पंचकोसी यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव रत्नाकर सागर (उंडासा तालाब) यह बताता है कि इसका इतिहास 2600 साल से भी ज्यादा पुराना है। दरअसल यहां हुई खुदाई में इस अवधि तक के अवशेष पाए गए थे, जिससे पता चलता है कि यहां से निरंतर यात्री गुजरते रहे। पुराविद् मानते हैं कि यहां इस अवधि से पूर्व भी मीठे पानी की झील और बस्ती हुआ करती थी।

मक्सी रोड के नजदीक स्थित उंडासा तालाब का प्राचीन इतिहास है। पंचकोसी यात्रा का यह अहम्‌ पड़ाव स्थल है। पुराविद् बताते हैं कि सागर अति प्राचीन है। सिंधिया स्टेट के समय वर्ष 1936-38 के मध्य यहां खुदाई गई थी। इसमें कई प्राचीन सामग्री मिली। यह सामग्री कम से कम 2600 साल पुरानी है। यानि यहां बसाहट इससे भी पहले की थी। यहां मीठे पानी की झील पाई जाती थी, जो यात्रियों को सुकून देती थी। पाल पर बावड़ी के रूप में बनी जल संरचना भी इतनी ही पुरानी है। कालांतर में कई बार इसका जीर्णोद्घार हो चुका है। पुराविद् डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं कि इस बावड़ी पर उकेरी गईं प्रतिमाएं ही हजार साल पुरानी हैं। इससे प्रमाण मिलता है कि यहां जीर्णोद्घार होता रहा है। 2600 साल पुरानी सामग्री बताती है कि उस कालखंड में यहां से यात्री गुजरते रहे। संभवतः यही कारण है कि पंचकोसी का भी यह महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह साक्ष्य भी मिलते हैं कि सैकड़ों वर्ष पूर्व अरब सागर की ओर जाने वाले बौद्घ, शैव व वैष्णव सहित अन्य यात्री इसी मार्ग का उपयोग करते थे। यहां यात्रियों का पड़ाव डाला जाता था। सागर अपने मीठे पानी के लिए ख्यात था।

प्रवासी पक्षियों का भी आश्रय स्थल

उंडासा तालाब पर हर साल सर्दियों के मौसम में 70 हजार किमी दूर साइबेरिया से प्रवासी पक्षी आते हैं और इसके पानी में अठखेलियां करते हैं। अन्य मौसम में भी प्रवासी पक्षी यहां नजर आते हैं। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक उमड़ते हैं।