उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सिंहस्थ क्षेत्र में अवैध निर्माण मामले में नगर निगम के पांच भवन अधिकारियों और नौ निरीक्षकों पर ढाई महीने बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाई है। जबकि सभी अधिकारी अपनी सफाई में हफ्तों पहले नोटिस का जवाब अधीक्षण यंत्री जीके कंठिल को दे चुके हैं। जवाब के आधार पर कार्रवाई के लिए नोटशीट भी बन चुकी है, बस इसे आयुक्त अंशुल गुप्ता की पेशी में नहीं रखा जा रहा है।

मालूम हो कि सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण होने और अवैध कालोनियां कटने पर निगम आयुक्त ने तत्कालीन भवन अधिकारी ओपी गोयल, जीएस जादौन, रामबाबू शर्मा, अरुण जैन, अनिल जैन, भवन निरीक्षक गोपाल बोयत, राजेंद्र रावत, अनुशिता जैन, साधना चौधरी, ज्योत्सना उबनारे, निशा वर्मा, सौम्या चतुर्वेदी, किशोर शुक्ला, हरीश शर्मा को नोटिस जारी किया था। कहा था कि आपकी लापरवाही से सिंहस्थ मेला के लिए आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण हुआ। अवैध कालोनियां कटी। सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण कैसे हुआ, अवैध कालोनियां कैसे कट गई, तीन दिन में जवाब प्रस्तुत करें। सभी ने जवाब प्रस्तुत किया। जवाब के आधार पर अधीक्षण यंत्री जीके कंठिल ने कार्रवाई के लिए नोटशीट तैयार भी की, मगर आगे कार्रवाई नहीं बढ़ पा रही।

तीन वर्ष कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्राविधान

नगर निगम एक्ट में उल्लेखित है कि अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी निगम आयुक्त के अधिन भवन अधिकारियों और भवन निरीक्षकों की है। पुलिस-प्रशासन की मदद लेकर तत्काल अवैध निर्माण हटवाए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो वे तीन वर्ष के कारावास, 10 हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों सजा से दंड पाने के अधिकारी होंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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