Pitru Paksha 2020 : उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भादौ मास की पूर्णिमा पर दो सितंबर से महालय श्राद्ध की शुरुआत होगी। इस बार श्राद्घ पक्ष का आरंभ बुधादित्य योग के साथ हो रहा है। सर्वपितृ अमावस्या पर पक्ष काल का समापन शुभयोग के संयोग में होगा। सोलह दिवसीय श्राद्घ में 10 दिन अमृतसिद्घि, सर्वार्थसिद्घि योग तथा पुष्य नक्षत्र का विशिष्ट संयोग भी रहेगा। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार शुभ संयोगों की साक्षी में पितरों का श्राद्घ करने से वंशवृद्घि, शुभ कार्यों को प्रगति मिलेगी। मांगलिक कार्यों में आ रहे अवरोध दूर होंगे।हालांकि कुछ पंडित इसकी शुरुआत एक सितंबर से बता रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार इस बार श्राद्घ पक्ष में किसी भी तिथि का क्षय नहीं है। पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक सोलह दिवसीय श्राद्घ पक्ष में पूर्ण तिथियां रहेंगी। महालय श्राद्घ पक्ष का आरंभ 2 सितंबर को बुधादित्य योग में होगा।

बुधादित्य योग में बुध तथा सूर्य की युति सिंह राशि में रहेगी। धर्मशास्त्र व पौराणिक मान्यता से देखें तो पितरों का पृथ्वी पर आगमन सिंह राशि के सूर्य से तुला राशि के सूर्य पर्यंत रहता है। इस समय पितृ अर्थात पूर्वज अपने अग्रजों की ओर देखते हैं तथा जल व पिंड दान की आशा करते हैं। घर में सुख, शांति, समृद्घि तथा पितरों की प्रसन्नता व पदवृद्घि के लिए श्राद्घ पक्ष में पितरों का श्राद्घ करना आवश्यक माना गया है।

तिथि अनुसार करें श्राद्ध

पं.डब्बावाला ने बताया पितरों को मृत्यु के एक, तीन, पांच, सात, नौ तथा ग्याराह वर्ष के भीतर श्राद्घ में लेना चाहिए। जिस तिथि पर व्यक्ति की मृत्यु हुई है, उसी तिथि पर उन्हें श्राद्घ में लेना चाहिए। इसके बाद प्रतिवर्ष श्राद्घ पक्ष में तिथि के दिन ही श्राद्घ करने का विधान बताया गया है।

श्राद्घ पक्ष में किस तिथि पर कौन सा संयोग

4 सितंबर तृतीया तिथि अमृतसिद्घि योग

6 सितंबर चतुर्थी तिथि सर्वार्थसिद्धि योग

7 सितंबर पंचमी भरणी श्राद्घ

8 सितंबर षष्ठी तिथि सर्वार्थसिद्घि योग

9 सितंबर सप्तमी तिथि सर्वार्थसिद्घि योग

13 सितंबर एकादशी तिथि रविपुष्य नक्षत्र

14 सितंबर द्वादशी तिथि सोमपुष्य नक्षत्र

15 सितंबर त्रयोदशी भौम प्रदोष के साथ सर्वार्थसिद्घि योग

16 सितंबर चतुर्दशी तिथि मघा श्राद्घ

17 सितंबर सर्वपितृ अमावस्या शुभयोग

शहर में यहां होंगे पितृकर्म

धर्मधानी उज्जयिनी में मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट, सिद्धवट घाट तथा गयाकोठा तीर्थ पर पुरोहित महालय श्राद्घ कराएंगे। स्थानीय के साथ ही देशभर से श्रद्घालु अपने पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान कराने आएंगे।

लॉकडाउन के बाद मिली अनुमति

प्रशासन ने लॉकडाउन के बाद तीर्थ स्थलों पर शारीरिक दूरी का पालन कराते हुए पितृकर्म कराने की अनुमति दी है। इसके बाद से तीर्थ पुरोहित शिप्रा के विभिन्न घाटों पर पितृकर्म करा रहे हैं। पं.डब्बावाला ने बताया लोक परिवहन के साधन बंद रहने से श्राद्घपक्ष में दूरदराज से बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना कम है। जो श्रद्घालु तीर्थ पर आएंगे उन्हें कोरोना नियम का पालन कराते हुए पितृकर्म कराए जाएंगे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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