उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। उज्जैन रेलवे स्टेशन पर बेसहारा मिलीं जुड़वां बहने पूजा और देविका, जो मंगलवार दोपहर आईटी प्रोफेशनल पिता के संग जिंदगी जीने कोलकाता चली गई। जाने से पहले कह गई कि अरसे से जिस खुशी की तलाश थी वह मिल ही गई। अब नए माता-पिता का प्यार पाकर अपने सपने पूरे कर सकेंगीं। पूजा और देविका की उम्र 15 वर्ष है। दोनों तीन साल से लालपुर स्थित बालिका गृह में निवासरत थी।

उनकी अधीक्षिका मीना मूंगे ने मंगलवार दोपहर मातृछाया की मदद से दोनों बालिकाओं को बतौर बेटी कोलकाता के नि:संतान दंपती आईटी प्रोफेशनल अंजोम-सोमा गंगोपाध्याय को सौंप दिया। उम्र के इस पड़ाव पर रिश्तों की कड़ियां जुड़ने पर चारों बेहद खुश थे। खुशी के इस लम्हें में पूजा और देविका ने 'नईदुनिया' से कहा कि वे बेहद खुश हैं, जो उन्हें कुदरत ने दोबारा माता-पिता का प्यार दिया।। पूजा ने डांसर और देविका ने इंजीनियर बनने की इच्छा जताई।

मीना मूंगे और मातृछाया के रत्नेश जैन ने बताया कि दोनों बहने वर्ष 2013 में रेलवे स्टेशन से बेसहारा मिली थीं। बाद में उन्हें चाइल्ड लाइन की मदद से फाजलपुरा स्थित बालिका आंगनगृह, फिर वहां से नारी निकेतन और फिर वर्ष 2015 में बालिका गृह भेज दिया गया था। पूछताछ में उन्होंने बताया था कि उनकी मां के निधन के बाद पिता स्टेशन पर छोड़ गए थे। कुछ महीनों पहले उसके पिता की भी मौत हो गई थी।

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