Ram Mandir Bhoomi Pujan : नईदुनिया, उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन के चार भजन गायकों को पिता से विरासत में राम नाम का मंत्र मिला, जिससे उन्होंने सारी दुनिया में राम की अलख जगाई। करीब 350 भजन लिखे, गाए और राम के चरित्र का गुणगान किया। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के भूमिपूजन के उपलक्ष्य में इन्होंने एक और भजन तैयार किया है। उसके मुखड़े के बोल हैं 'रामलला हो रामलला, अवध के प्यारे रामलला'। सोशल मीडिया में इस भजन को काफी पसंद किया जा रहा है।

शर्मा बंधु के नाम से ख्यात ये चारों भाई-83 वर्षीय पंडित गोपाल, 75 वर्षीय पंडित शुकदेव, 72 वर्षीय पंडित कौशलेंद्र और 66 साल के पंडित राघवेंद्र हैं। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर सभी राम भक्तों की तरह शर्मा बंधु भी आल्हादित हैं।

दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया'' से खास चर्चा में उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण का भूमिपूजन देश के इतिहास में निश्चित ही स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा। उन्हें राम की भक्ति और भजन की शिक्षा-दीक्षा पिता पं. रामानंद महाराज से मिली थी।

रामानंद महाराज ने 1920-21 से भजनों के माध्यम से राम नाम की अलख जगाने का काम शुरू किया था। 1993 में उन्होंने शरीर त्याग दिया था। उनके साथ और अब उनके बाद भी ये काम जारी है। हम चारों भाइयों के एक-एक बेटे हैं। वे भी भजनों के माध्यम से श्रीराम का चरित्र और महिमा जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।

'सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को..'' गीत से मिली प्रसिद्धि

यूं तो शर्मा बंधुओं के कई भजन ख्यात हैं, मगर 'सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाए तरवर की छाया' सबसे खास है। यह भजन उनके पिता रामानंद शर्मा द्वारा लिखा गया था। यह पहली बार फिल्म परिणय (1974) के माध्यम से लोगों को सुनने को मिला।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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