Road Safety Campaign Ujjain: धीरज गोमे, उज्जैन। सुप्रीम कोर्ट द्धारा इसी साल 29 मार्च को जारी रोड सेफ्टी गाइडलाइन का उज्जैन में जरा भी पालन नहीं हो रहा है। सड़क सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारों की ये गंभीर लापरवाही है, जिसका खामियाजा सड़क हादसों में शिकार लोग भुगत रहे हैं। हालात यह है कि सड़क दुर्घटनाएं रोकने को जिले का रोड सेफ्टी प्लान का प्लान तक नहीं बन पाया है। शहरी सीमा में वाहन चलाने की अधिकतम गति कितनी हो, इसके संकेतक बोर्ड भी नहीं लगे हैं। सभी प्रमुख चौराहों पर बाएं मोड़ की बाधाएं, और यातायात संकेतकों की कमी भी उदाहरण है।

मालूम हो कि देश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और इनमें होने वाली जान-माल की हानि को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने 29 मार्च 2022 को एक गाइडलाइन जारी की थी। कमेटी ने हर जिले का रोड सेफ्टी प्लान बनाने, सड़क सुरक्षा समिति बनाने, समिति की बैठक हर माह करने, सड़क दुर्घटनाओं की सारी जानकारी आनलाइन पब्लिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कमद उठाने के निर्देश दिए थे। इसके पालन में बीते आठ महीने में तीन मर्तबा जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हुई। तीनों बैठकों में एक कामन निर्देश दिए कि स्कूलों बसों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। ब्लैक स्पाट हटाए जाएं। देवास गेट से चरक अस्पताल के बीच यात्री बसों का रूकना बंद कराया जाएं। सड़क से जुड़े विशेषज्ञों का बार-बार एक निर्देशों का जारी होना स्पष्ट करता है कि पूर्व निर्देशों का कढ़ाई से पालन नहीं हुआ।

कलेक्टर के निर्देशों का मखौल

13 जून को हुई बैठक में कलेक्टर आशीष सिंह ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, जिला शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, यातायात पुलिस, लोक निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारी से रोड सेफ्टी प्लान जुलाई में प्रस्तुत करने को कहा था। कहा था कि सड़क सुरक्षा को लेक राज्य सड़क सुरक्षा नीति 2015 और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन अनुरूप कार्य योजना बनाकर प्रस्तुत करें, लेकिन प्लान अब तक नहीं बना। परिणाम स्वरूप अब तक सड़क सुरक्षा के बेहतर उपाय भी नहीं किए जा सके। जिसका नतीजा यह निकला कि बीते एक वर्ष 1550 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 10682 लोग घायल हुए और 1558 की मृत्यु हुई।

पिछले सप्ताह हुई बैठक में दिए ये थे निर्देश

- शहरी क्षेत्र में वाहनों की अधिकतम गति सीमा 60 किमी के संकेतक बोर्ड लगाएं।

- विद्यार्थियों को स्कूल लाने और स्कूल से घर छोड़ने वाले वाहन अब स्कूल परिसर में ही पार्क हों, ताकि सड़क पर बेवजह का ट्रैफिक जाम न हों।

- स्कूल बसों का भौतिक सत्यापन एसडीएम की मानीटरिंग में कराया जाए।

- देवास गेट से चरक अस्पताल के बीच यात्री बसों का रूकना बंद कराया जाएं।

सुप्रीम कोर्ट कमेटी की गाइडलाइन के मुख्य बिंदु ये

1. जिले में सड़क दुर्घटनाओं की समय-समय पर समीक्षा हो।

2. राज्य सड़क सुरक्षा नीति के कार्यान्वयन और इसके अंतर्गत निर्धारित लक्ष्‌यों की निगरानी हों।

3. सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के निर्देश लागू हो।

4. जिले में राज्य सड़क सुरक्षा परिषद के निर्णयों का कार्यान्वयन हों।

5. सड़क दुर्घटनाओं के विवरण पर राज्य सड़क सुरक्षा परिषद को नियमित रूप से ट्रैक और अपडेट हों।

6. जिला सड़क सुरक्षा योजना तैयार हों।

7. सभी सामूहिक मौतों के लिए एमवीए की धारा 135ए के तहत फोरेंसिक दुर्घटना जांच सुनिश्चित हों।

8. बड़े पैमाने पर घातक दुर्घटनाओं के लिए एक आपातकालीन चिकित्सा योजना तैयार हों।

9. अस्पतालों और एंबुलेंस के बीच संबंध सुनिश्चित करें। उपलब्धता का पता लगाने के लिए अस्पतालों के बीच संबंध सुनिश्चित हों

10. सड़क दुर्घटना पीड़ितों की सहायता के लिए नेक लोगों को बढ़ावा दिया जाए

Posted By: Nai Dunia News Network

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