उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धर्मनगरी उज्जैन के प्राचीन एवं पौराणिक महत्व के सप्त सागरों पर अतिक्रमण है और कुछ निजी व्यक्तियों के नाम राजस्व अभिलेखों में भी गलत तरीके से चढ़ गए हैं। विभागीय जांच में यह बात सामने आने पर कलेक्टर आशीष सिंह ने उज्जैन और घट्टिया के एसडीएम को गुरुवार शाम आदेश जारी किया है कि वे महीनेभर में अतिक्रमण हटाए और अभिलेखों में हुई गलत प्रविष्टियां मिटाकर विधि सम्मत कार्रवाई करें।

आदेश में लिखा है कि वर्ष 1899 के नक्शे- नंबरों को 1927 के अधिकार अभिलेख के आधार पर रूद्र सागर, गोवर्धन सागर, पुरुषोत्तम सागर, पुष्कर सागर और क्षीरसागर पर हुए अतिक्रमण को चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करें। यदि राजस्व और नगर निगम के अभिलेखों में गलत प्रविष्टियां हैं तो उनकी जांच कर प्रविष्टि सुधारने के लिए विधि अनुसार कार्रवाई करें। जिन मामलों में सिविल न्यायालय की सहायता की जरूरत है, वहां शासकीय अभिभाषक से अभिमत लेकर कार्रवाई करें। विष्णुसागर और उंडासा में स्थित रत्नाकर सागर के संबंध में भी नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें। वर्ष 1899 के नक्शे में दर्ज अन्य तालाबों दूधतलाई, नीलगंगा और सूरजकुंड की मौके पर जांच कर कार्रवाई करें।

स्थायी और अस्थायी दोनों तरह के अतिक्रमण

सप्त सागरों पर स्थायी और अस्थायी, दोनों ही तरह के अतिक्रमण पाए गए हैं। कुछ ने दुकानें तान ली है तो कुछ ने व्यावसायिक गतिविधियां कर रखी है। यानी शासकीय संपित्त से गैर शासकीय लोग पैसा बना रहे हैं। जानकारों का कहना है कि ये काम बगैर किसी शासकीय सेवक और राजनीतिक संरक्षण के होना संभव नहीं है। क्योंकि सामान्यतः शासकीय जमीन पर होने वाले हर निर्माण, अतिक्रमण, कब्जे की खबर जिम्मेदार पटवारी, नगर निगम के दरोगा, राजस्व निरीक्षक, भवन निरीक्षक को होती है। यह उनकी ड्यूटी भी है। उदाहरण के तौर पर इंदिरानगर स्थित पुरुषोत्तम सागर कैम्पस में कुछ लोगों ने मिट्टी पटक अखाड़ा बना लिया है। इसे लेकर कई बार शिकायत भी हुई है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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