उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)।Shiva Navratri Festival बारह ज्योतिर्लिंगों में महाकाल एक मात्र ज्योतिर्लिंग हैं, जहां शिवनवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। उत्सव जितना पुराना है, इसकी परंपराएं भी उतनी अनूठी हैं। शिवनवरात्रि में राजा महाकाल नारदीय संकीर्तन से हरि कथा का श्रवण करते हैं। यह परंपरा 111 साल से चली आ रही है।

प्रतिवर्ष भगवान महाकाल को हरि कथा सुनाते हैं इंदौर के कानड़कर परिवार के सदस्य

इंदौर के कानड़कर परिवार के सदस्य प्रतिवर्ष भगवान महाकाल को हरि कथा सुनाने आते हैं। इस बार 13 फरवरी से कानड़कर परिवार के रमेश श्रीराम कानड़कर भगवान को हरि कथा सुनाएंगे। मंदिर परिसर स्थित मार्बल चबूतरे पर 23 फरवरी तक प्रतिदिन शाम 4 से 6 बजे तक कथा का आयोजन होगा।

परिवार नौ पीढ़ी से महाकाल के आंगन में हरि कथा कर रहा

80 वर्षीय रमेश कानड़कर ने बताया परिवार नौ पीढ़ी से महाकाल के आंगन में हरि कथा कर रहा है। भगवान नारदजी जिस प्रकार खड़े रकर कर्तल ध्वनी के साथ हरि नाम संकीर्तन करते रहते हैं, उसी प्रकार खड़े होकर संकीर्तन पद्धति से हरि कथा का वाचन किया जाता है।

कथा खंडों में से कुछ का वाचन किया जाता है

नारदीय संकीर्तन कथा के 11 खंड हैं। भगवान महाकाल की प्रेरणा से कथा खंडों में से कुछ का वाचन किया जाता है। भक्तों को भी कथा श्रवण में आनंद आता है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में भक्त धर्मलाभ लेने आते हैं। इस बार भी 13 से 23 फरवरी तक कथा का आयोजन होगा। रमेशजी शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। परिवार की परंपरा को निभाने के लिए प्रतिवर्ष राजा की सेवा में उपस्थित होते हैं।

Posted By: Hemant Upadhyay

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