उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Shiva Navratri Festival ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में 13 फरवरी से शिवनवरात्रि उत्सव की शुरुआत होगी। नौ दिन तक राजाधिराज महाकाल का विशेष अभिषेक-पूजन व श्रंगार होगा। मंदिर की परंपरा अनुसार भगवान महाकाल से पहले पुजारी कोटितीर्थ कुंड के समीप स्थित भगवान कोटेश्वर महादेव का पूजन करेंगे।

भगवान महाकाल से पहले श्री कोटेश्वर महादेव के पूजन का विधान

पं.आशीष पुजारी से मिली जानकारी के अनुसार ज्योतिर्लिंग की परंपरा में भगवान महाकाल से पहले श्री कोटेश्वर महादेव के पूजन का विधान है। 13 फरवरी को सुबह 8 बजे से श्री कोटेश्वर महादेव पर शिवपंचमी के पूजन के साथ शिवनवरात्रि का आरंभ होगा। इसके बाद सुबह 9.30 बजे मंदिर के गर्भगृह में भगवान महाकाल की पूजा अर्चना के पश्चात 11 ब्राह्मणों द्वारा एकादश-एकादशनी रूद्राभिषेक होगा। 21 फरवरी को महाशिवरात्रि तक यह क्रम प्रतिदिन चलेगा।

भोग आरती व संध्या पूजन का समय बदलेगा

शिवनवरात्रि के दौरान भगवन महाकाल की भोग आरती व संध्या पूजन का समय बदलेगा। आमदिनों में सुबह 10.30 बजे भोग आरती होती है। लेकिन शिवनवरात्रि के नौ दिन सुबह 9.30 बजे से विशेष पूजा की शुरुआत हो जाएगी। इसलिए भोग आरती पूजन संपन्न् होने के बाद दोपहर करीब 1 बजे होगी। इसी प्रकार आमदिनों में शााम 5 बजे होने वाली संध्या पूजा नवरात्रि में दोपहर 3 बजे से होगी।

दूल्हा महाकाल को लगेगी हल्दी

जानकारी के अनुसार शिवनवरात्रि में कोटेश्वर महादेव व भगवान महाकाल को हल्दी लगाई जाएगी। भगवान को हल्दी,चंदन, केसर मिश्रित पंचामृत से अभिषेक कराया जाएगा। लौकिक मान्यता में दूल्हे को हल्दी लगाई जाती है, शिवनवरात्रि में यह उसी का प्रतीक है।

Posted By: Hemant Upadhyay

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