भोपाल, उज्‍जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में मंगलवार को उत्सव जैसा माहौल रहा। इसकी वजह है दो सौ साल बाद उज्जैन में राजा महाकाल के दरबार में मध्य प्रदेश की शिवराज मंत्रिपरिषद की बैठक । ऐसी बैठक जिसमें पहली बार मंत्रिपरिषद की 'अध्यक्षता " करने वाली कुर्सी पर बाबा महाकाल (तस्वीर) को बिठाया गया और उनके सेवक बतौर उनके एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दूसरी तरफ मुख्यसचिव इकबाल सिंह बैंस बैठे।

बैठक में सबसे पहले विधि विधान से पूजा-पाठ कर महाकाल को प्रणाम कर प्रदेश की खुशहाली और देश-प्रदेश के कल्याण की प्रार्थना की गई। कैबिनेट की कार्यवाही शुरू करने के साथ महाकाल प्रांगण के नामकरण के प्रस्ताव 'महाकाल लोक" को पारित किया गया। मंत्रियों ने खड़े होकर इस निर्णय पर तालियां बजाईं।

चौहान ने कहा कि महाकाल महाराज उज्जैन के राजा हैं और हम लोग सेवक हैं। हम सेवक के नाते महाकाल महाराज की नगरी में आज की बैठक कर उनसे प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी कृपा और आशीर्वाद हम सब पर बना रहे। हम सबके लिए यह ऐतिहासिक पल है। वर्ष 2017 में जब हमारी सरकार थी, उस समय यह विचार आया था कि महाकाल परिसर का विस्तार किया जाए।

इस संबंध में नागरिकों, मंदिर समितियों और स्टेक होल्डर से चर्चा कर परिसर के विस्तार की योजना बनाई गई। महाकाल परिसर विस्तार के लिए हमने दो चरण तय किये, प्रथम चरण 351 करोड़ रुपये का था, फिर हमने द्वितीय चरण के लिए 310 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। परिसर विस्तार के कार्य में कई मकान विस्थापित किए। हमने 150 करोड़ रुपये की लागत से विस्थापन कार्य किया। विकास कार्यों की लंबी श्रंखला है। रुद्रसागर के पुनर्जीवित होने से इसमें क्षिप्रा नदी का पानी रहेगा। मंदिर में लाइटिंग और साउंड सहित महाकाल पथ का निर्माण किया गया। दूसरे चरण में भी अनेक कार्य पूर्ण होने हैं। ये सभी कार्य महाकाल महाराज ही करवा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 11 अक्टूबर को इसका लोकार्पण करेंगे। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि उज्जैन में हवाई पट्टी का विकास किया जाएगा, इसके लिए 41 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। उज्जैन में पुलिस बैंड में 36 कर्मचारी शामिल होंगे, इसका आकार बड़ा किया जाएगा। शिप्रा नदी कलकल और प्रवाहमान रहे इसलिए रिवर लेक फ्रंट की तर्ज पर घाटों का विस्तार होगा।

इस लिए रखा महाकाल लोक नाम

महाकाल मंदिर परिसर का नाम महाकाल लोक रखे जाने को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धाम देश में पहले से चार हैं। महाकाल वन क्षेत्र नाम में स्पष्टता नहीं है। इसलिए नव विस्तारित क्षेत्र का नाम "महाकाल लोक' रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नामकरण को लेकर कई विद्वानों से सुझाव मिले। जूना अखाड़े के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि से भी नाम को लेकर चर्चा हुई। इधर नाम को लेकर विद्वानों ने कहा है कि लोक का मतलब संसार, जगह है। देवता के रहने का विशिष्ट स्थान से है। आकाश में तारक लिंग, पाताल में हाटकेश्वर लिंग और पृथ्वी पर महाकालेश्वर ही मान्य शिवलिंग है। मान्यता के अनुसार महाकाल, पृथ्वी लोक के अधिपति हैं। वे तीनों लोकों के और संपूर्ण जगत के अधिष्ठाता भी हैं। इसलिए यह नाम अतिउत्तम है।

उज्जैन में बाबा महाकाल ने ली शिवराज कैबिनेट की बैठक

कैबिनेट बैठक में ये फैसले हुए

- 351 करोड़ से निर्मित महाकालेश्वर प्रांगण को महाकाल लोक के नाम से जाना जाएगा, दूसरे चरण के काम भी जल्द शुरू होंगे। 11 अक्टूबर को पीएम मोदी इसका लोकार्पण करेंगे।

- उज्जैन में हवाई पट्टी का विस्तारीकरण कर इसे एयरपोर्ट की तरह विकासित करेंगे। पहली बार में 80 करोड़ की लागत से ये काम होगा।

- 11 की जगह 37 पद वाला पुलिस बैंड होगा, इसके लिए नए पद स्वीकृत किए गए हैं।

- शिप्रा अविरल बहती रहे, इसके लिए प्रोजेक्ट बनाने की सैद्धांतिक स्वीकृति। रिवर फ्रंट की तर्ज पर घाट विस्तार होगा।

- स्वच्छता लीग में एमपी का पहला स्थान आया है। नगरीय प्रबंधन व सबसे क्लीन सिटी में इंदौर नंबर 1, उज्जैन पर्यटन सेवा में अव्वल आया है।

- मुख्यमंत्री उद्यमी योजना में उम्र वृद्धि की गई। अहर्ता भी 8वीं कर दी गई।

- जल जीवन मिशन में प्रदेश के 22 जिले के 90197 गावों में 17 हजार करोड़ रुपये की सतही नल जल योजना स्वीकृत।

मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक पहली बार उज्जैन हुई। पहले यह बैठक भोपाल में होना तय थी मगर इसी दिन मुख्यमंत्री के देवास दौरे को देखते हुए बैठक पड़ोसी शहर उज्जैन में करने का निर्णय लिया गया। बैठक से पहले मुख्यमंत्री और मंत्रिगण ने महाकाल प्रांगण में हुए 316 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों का अवलोकन किया।

सिंधिया शासन में 1761 से 1812 तक राजधानी थी उज्जैन

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंडी डा. मोहन यादव ने बताया कि 1761 से लेकर 1812 तक उज्जैन सिंधिया शासन की राजधानी थी। तब शासन के महत्वपूर्ण बैठकें यहीं होती थी। 200 से अधिक वर्ष के बाद पुन: यह वैभव प्राप्त हुआ है। इसलिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अपने उद्बोधन में 200 वर्ष का जिक्र किया।

सिंधिया राजघराने की तत्कालीन राजधानी उज्जैन में आखिरी बार 1818 में दरबार लगा था। इसके बाद सिंधिया अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार कर ली थी। स्वतंत्र भारत में यह पहला अवसर है, जब उज्जैन में किसी सरकार ने बैठक की हो।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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