Shradh Paksha 2021: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा पर 21 सितंबर को 100 साल बाद दिव्य संयोगों व ग्रहों की श्रेष्ठ स्थिति में महालय श्राद्ध पक्ष का आरंभ होगा। इस बार श्राद्ध पक्ष की शुरुआत सर्वार्थसिद्धि योग में हो रही है। पर्वकाल का समापन भी सर्वार्थसिद्धि योग में आ रही सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर होगा। 16 दिवसीय पर्वकाल में पांच सर्वार्थसिद्धि, एक अमृत गुरु पुष्य योग तथा गजछाया योग का महासंयोग रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार इस दुर्लभ पक्षकाल में पितरों के निमित्त श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्ना्‌ होकर सुख,शांति व वंशवृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया श्राद्ध के लिए भाद्रपदा मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से अश्विन कृष्ण अमावस्या तक 16 दिवसीय पक्षकाल माना जाता है। श्रद्धालु दिवंगत हुए अपने पितरों की तिथि अनुसार तीर्थ पर श्राद्ध करने आते हैं। धर्मधानी उज्जैन पितृकर्म के लिए विशेष मानी गई है। यहां पितरों को श्राद्ध करने से गया के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। स्कंदपुराण के अवंतिखंड में उज्जैन में श्राद्ध करने के लिए सिद्धवट, रामघाट व गयाकोठा तीर्थ का उल्लेख मिलता है। 20 सितंबर को भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि रहेगी। अगले दिन 21 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि योग की साक्षी में श्राद्ध पक्ष का आरंभ हो जाएगा। 6 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि व गजछाया योग के महासंयोग में सर्वपितृ अमावस्या पर पक्ष काल का समापन होगा।

गुरु के तारे का उदित रहना भी खास

धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार महालय श्राद्ध पक्ष में गुरु के तारे का उदित रहना तथा तिथि का खंडित नहीं होना अतिश्रेष्ठ माना जाता है। इस बार सोलह दिवसीय पर्वकाल में यह विशिष्ट स्थिति भी बन रही है। श्राद्ध पक्ष में गुरु का तारा भी उदित अवस्था में रहेगा तथा श्राद्ध पूरे सोलह दिन के रहेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local