उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को साफ पानी मिल सके, इसके लिए जिला प्रशासन ने त्रिवेणी क्षेत्र के समीप मिट्टी का कच्चा बांध बनाया था। बांध से कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा में मिलने से रोका जा रहा था। यहीं बांध शुक्रवार-शनिवार दरमियानी रात बह गया। इससे कान्ह का गंदा पानी शिप्रा नदी में मिला। इधर अधिकारियों का दावा है कि घाटों पर पानी साफ है। उल्लेखनीय है कि इस मामले को शुक्रवार को ही सांसद अनिल फिरोजिया ने लोकसभा में उठाया था।

उल्लेखनीय है कि इंदौर से आ रही कान्ह नदी प्रदूषित है और उसका गंदा पानी शिप्रा में मिलता आया है। गंदा पानी शिप्रा में न मिले इसके लिए कुछ योजनाएं तो बनीं, मगर सफल नहीं हो सकीं। इनमें से एक योजना कान्ह डायवर्शन की भी है। कान्ह का गंदा पानी शिप्रा में नहीं मिले इसके लिए समय-समय पर मिट्टी का कच्चा बांध बनाया जाता है। हालांकि ऐसे बांध टिक नहीं पाते और कुछ ही महीनों में बह जाते हैं।

तीन दिन पहले ही तैयार किया था बांध

त्रिवेणी घाट के समीप गोठड़ा गांव में बनया गया मिट्टी का कच्चा बांध तीन दिन पहले ही बनकर तैयार हुआ था। शनिश्चरी अमावस्या को देखते हुए ताबड़तोड़ इंतजाम किए गए थे। वहीं पाइपलाइन के जरिये नर्मदा का पानी शिप्रा में लाया गया था। मगर शुक्रवार-शनिवार की रात बांध के बह जाने से गंदा पानी शिप्रा में मिल गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि घाटों पर नर्मदा का साफ पानी है। श्रद्धालु इसी में स्नान कर रहे हैं। इधर शनिश्चरी अमावस्या पर त्रिवेणी आदि घाटों पर अपेक्षाकृत कम श्रद्धालु पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं के लिए घाटों पर फव्वारे भी लगाए गए हैं।

ठोस योजना पर हो काम

बता दें कि यह शिप्रा में गंदा पानी मिलने के मामला शुक्रवार को लोकसभा में भी उठा था। सांसद अनिल फिरोजिया ने मांग की थी कि शिप्रा शुद्धिकरण के लिए ठोस योजना पर काम होना चाहिए। सांसद का कहना है कि इसके लिए सभी विभागों को तालमेल से काम करना होगा।

शिप्रा शुद्धाकरण के लिए ये कार्य जरूरी

जानकारों का का कहना है कि शिप्रा शुद्धिकरण के लिए दो स्तर पर काम करना होगा। पहला, इंदौर में सीवरेज के पानी का बेहतर ट्रीटमेंट। दूसरा, त्रिवेणी घाट के पास गोठड़ा गांव में पक्के और स्थायी बांध का निर्माण। सिंहस्थ- 2016 बाद से हर साल जल संसाधन विभाग त्रिवेणी घाट के पास गोठड़ा में कच्चा मिट्टी का बांध बना रहा है। हर बार बांध बनाने में 20 से 25 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। यानी अब तक 1 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इस वर्ष भी 20 लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर कच्चा बांध बनाया गया है। अगर इसी जगह 5 से 7 मीटर ऊंचा और 80 मीटर लंबा बांध पक्का स्थायी बांध बना दिया जाए तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो जाएगा। बांध बनाने में करीब 4 करोड़ 72 लाख रुपये खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव शासन को पिछले वर्ष जल संसाधन विभाग द्वारा भेजा भी जा चुका है।

Posted By: Prashant Pandey

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