उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ज्योतिर्लिंग महाकाल का पुरातात्विक महत्व खंगाल रही है। इसके लिए मंदिर के इंजीनियर व कर्मचारी शहर के पुरातात्विक संग्रहालयों का भ्रमण कर रहे हैं। शहर के पुराविद् व धर्मशास्त्र के जानकारों से भी चर्चा कर संदर्भ जुटाए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं मंदिर समिति महाकाल मंदिर के पुरातात्विक, पौराणिक व धार्मिक महत्व को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसे जल्द ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली को सौंपा जाएगा।

बताया जाता है महाकाल मंदिर के सौंदर्यीकरण व विकास को लेकर 100 साल का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मंदिर के आसपास जल्द ही करोड़ों रुपए की लागत से निर्माण कार्य होना है। नई संरचना मंदिर के पौराणिक महत्व को रेखांकित करे साथ ही मंदिर के पुरातात्विक स्वरूप को काई क्षति ना पहुंचे इसके लिए समग्र रिपोर्ट तैयार कि जा रही है। इस रिपोर्ट में मंदिर के अस्तित्व में आने के साथ कालांतर में हुए जीर्णोद्धार का सही समय पता करने का प्रयास किया जा रहा है।

मंदिर के पत्थर किस कालखंड में तराशे गए हैं, इसके खंभों पर ऊंकेरी गई कला कब की है? बीते ढाई दशक में क्या नए निर्माण हुए हैं, आदि सारा ब्योरा जुटाया जा रहा है। जानकारी एकत्र करने के लिए मंदिर के इंजीनियर व कर्मचारी विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातात्विक संग्रहालय, त्रिवेणी संग्रहालय, जयसिंहपुरा जैन संग्रहालय आदि का भ्रमण कर रहे हैं। पुराविदों से भी चर्चा कर जानकारी जुटाई जा रही है।