उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। मालवा की माटी में जो देसी अपनापन है, उसका सर्वोत्तम स्वरूप उज्जैन में दिखाई पड़ता है। त्रिलोकों के स्वामी भगवान महाकालेश्वर की इस नगरी में आज भी ऐसे सैकड़ों नागरिक हैं, जो प्रतिदिन पैदल बाबा के दरबार में नियमित रूप से पहुंचते हैं, तथा दर्शन करने एवं सेवा देने के उपरांत ही और कोई काम करते हैं।

बात व्यापार की हो तो यहां अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स से ज्यादा तवज्जो उन व्यवसायियों को मिलती है, जिनकी पीढ़ी दर पीढ़ी के समर्पण और सेवा ने गुणवत्ता की नई इबारत लिखी है। वहीं यदि बात जीवंत संपर्कों की हो तो उज्जैन में ऐसे अनेक दिग्गज हैं जो आपसे आपके पिताजी का नाम पूछकर आपके परिवार के बारे में ऐसे अनेक तथ्य बताना प्रारंभ कर दें जो स्वयं आपके लिए भी शायद नए हों।

उज्जैन में जन्म लेकर 1988 में स्नातक पूर्ण करने के बाद जब मैंने अपना कार्यारंभ किया तब से आज तक शिप्रा में बहुत पानी बह चुका है। व्यावसायिक शिक्षण एवं प्रबोधन के कार्य के चलते बड़े शहरों में आना -जाना भी लगा रहा। सभी स्थानों पर यह अनुभव पूरी शिद्दत के साथ हुआ कि विकास की दौड़ में भागते गिरते पड़ते लोगों की प्राथमिकताओं में अपने शहर की संस्कृति और ऐतिहासिक कलेवर को सहेजना कहीं नहीं था। प्रत्येक शहर में कुछ सेवानिवृत्त नागरिक अवश्य मिले जो इन हालातों पर चिंता व्यक्त करते मिले, किंतु कुछ बात है अपने इस उज्जैन की मिट्टी में कि अपनेपन की खुमारी आज भी विद्यमान है। भगवान महाकालेश्वर एवं उनके संपूर्ण आंगन में होते शानदार विकास में कहीं सहजता खो न जाए यह चिंता सिर्फ बुजुर्गों को नहीं बल्कि युवा पीढ़ी को भी लगातार सताती रही है। इसी क्रम में उज्जैन में सहज रूप से दृष्टिगोचर दो और प्रवृत्तियां उत्साह वर्धन करती हैं।

प्रकाश मुनि का मंगल प्रवेशः श्रमण संघीय प्रवर्तक प्रकाश मुनि द्यनिर्भयद्य एवं साध्वी मंडल का मंगल प्रवेश रविवार को महावीर भवन, नमक मंडी स्थानक में हुआ। यहां सामायिक की दया और नवकार महामंत्र के जाप हुए। मुनिश्री के साथ साध्वी चंदनबाला, चेतना आदि रविवार प्रातः 8.15 बजे बहादुरगंज स्थित कमलकुमार शांतिलाल लोढ़ा के निवास से मंगल विहार हुआ।

अतिक्रमण से परेशानीः शहर के प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिम्मेदार भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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