उज्जैन। ज्योतिषियों का दावा है कि इस बार बारिश के बाद सर्दी भी वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ेगी। शीत ऋ तु में त्रि, चतुर्थ व पंचग्रही युति का प्रभाव रहेगा। इसके चलते 16 दिसंबर से कंपकंपा देने वाली ठंड शुरू होगी। जनवरी से मौसम में विचित्र परिवर्तन दिखाई देगा। पहाड़ों पर बर्फबारी के साथ मैदानी इलाकों में मावठे की बारिश व ओलावृष्टि होगी। पश्चिमोत्तर क्षेत्र में इसका सबसे अधिक प्रभाव नजर आएगा। 17 मार्च के बाद ही स्थिति समान्य होगी।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार 16 दिसंबर से धनुर्मास की शुरुआत होगी। ज्योतिष गणित सिद्धांत व मैदिनी ज्योतिष के अनुसार देखें तो 16 दिसंबर से 16 जनवरी तक सूर्य, गुरु, शनि तथा केतु की चर्तुग्रही युति रहेगी। इस दौरान मौसम में परिवर्तन नजर आएगा।

पूर्व-उत्तर में कहीं-कहीं बर्फबारी तथा मावठे की बारिश होगी। 24 दिसंबर से चंद्र योग में उक्त चार ग्रहों के साथ बुध की युति बनेगी। बुध को मौसम का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में पंचग्रही युति योग में भीषण सर्दी के रूप में इसके प्रभाव देखने को मिलेंगे।

24 जनवरी से मकर राशि में सूर्य, बुध के साथ शनि की युति

सूर्य 15 जनवरी तथा बुध 17 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे। उसके सात दिन बाद 24 जनवरी को शनि भी मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में मकर राशि में सूर्य, बुध व शनि का त्रिग्रही युति योग बनेगा। इससे पश्चिम उत्तर के क्षेत्र तथा राष्ट्रों में अत्यधिक ठंड पड़ेगी। इसका प्रभाव करीब 1 माह तक रहेगा। इस दौरान सर्दी पूर्व के कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ेगी।

सामान्य रहेगा धान्य उत्पादन

तेज ठंड के बावजूद कृषि के क्षेत्र में इसका प्रभाव अधिकांश स्थानों पर सकारात्मक रहेगा। धान्य उत्पादन सामान्य होगा। फसलों के अनुरूप मौसम रहने से किसानों को ज्यादा कठिनाई नहीं होगी। फिर भी सावधानी रखने की आवश्यकता है।

Posted By: Sandeep Chourey