भारत छोड़ो आंदोलन : माधव कालेज और स्कूलों में की थी हड़ताल

आजादी के अमृत महोत्सव पर विशेष

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भारत छोड़ो आंदोलन देश में 8 अगस्त 1942 को शुरू हो गया था, मगर उज्जैन में इस क्रांति की आग तीन दिन बाद 11 अगस्त को भड़की थी। उस दिन युवाओं संग तरुणाई भी आंदोलन की आग में कूद पड़े थे। सभी विद्यार्थी स्टूडेंट फेडरेशन नामक संस्था के बैनर तले बंबाखाना के प्रांगण में एकत्र हुए थे जत्था लेकर कोठी पैलेस स्थित कलेक्टर कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने पहुंचे थे। उस समय कलेक्टर बाबूराव सूर्यवंशी थे। उनके कार्यालय की छत पर तब अंग्रेजी का अल्फाबेट अक्षर वी लकड़ी की सलाख से लगा हुआ था। छात्र संघ के अध्यक्ष गोवर्धनलाल ओझा ने बड़े साहस के साथ छत पर चढ़कर एक सलाख तोड़कर नीचे फेंक दी थी और दूसरी सलाख को सीधी खड़ी करके उस पर तिरंगा फहरा दिया था।

कलेक्टर ने चेतावनी दी थी कि अब यदि स्कूल-कालेज बंद कराए और कहीं भी तिरंगा झंडा फहराने की कोशिश की तो गोली मार दी जाएगी। छात्र-छात्राओं के लिए ये एक प्रकार की चुनौती थी। इस दिन के बाद प्रतिदिन छात्रों का शहर में जुलूस निकलता और छत्री चौक में सभा होती। उस समय शिक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल अंग्रेज वीडी रेले थे। वे प्रतिदिन एक न एक स्कूल का निरीक्षण करते थे। छात्र पता लगाकर उस स्कूल के आसपास पहुंचते और 'रेले भाग जाओ' के नारे लगाते थे। इन्हीं छात्रों ने 13 अगस्त को पहली बार उज्जैन बंद का नारा दिया था। देवास गेट स्थित माधव कालेज से छात्रों का एक बड़ा भारी जुलूस झंडा थामे गोपाल मंदिर की ओर चला था। ये जुलूस नई सड़क स्थित कल्पवृक्ष कार्यालय पहुंचा तो वहां आम लोग भी जुलूस में सम्मिलित हो गए थे। यहां विवाद बढ़ने पर अवंतिलाल जैन ने अपने साथियों के साथ मस्जिद पर चढ़कर सफेद रूमाल हिलाकर विवाद खत्म करने की अपील की थी। पुलिस ने इस सारे आंदोलन के लिए गिरधर ठक्कर को जिम्मेदार ठहराकर गिरफ्तार किया था। इन सारी घटनाओं का उल्लेख सन् 1998 में आजादी के 50 वर्ष पूर्ण होने पर उज्जैन जनसंपर्क विभाग द्धारा प्रकाशित पुस्तक 'उज्जैन जिले के स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास' और स्वतंत्रता सेनानी कृपाशंकर तिवारी द्धारा लिखित पुस्तक ' भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उज्जैन जिले का योगदान' में मिलता है।

आंदोलन की घोषणा के बाद पहली सभा छत्री चौक पर हुई थी

भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा के बाद आंदोलन को उज्जैन में शुरू करने के लिए पहली सभा छत्री चौक पर 10 अगस्त को हुई थी। इसमें पं.शिवशंकर रावल, मौलाना मसूद एहमद, अवंतिलाल जैन, मंगलीप्रसाद आजाद, कन्हैयालाल मेहता, मर्तांडराव टेलर आदि ने ओजस्वी भाषण दिया था। प्राचीन भारतीय इतिहास अध्ययनशाला की शोधार्थी रहीं, अब वहीं प्रोफेसर डा. आंजनासिंह गौर ने अपने शोध पत्र में लिखा है कि भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने वाले उज्जैन के अनेक वीर सेनानी सम्मिलित थे। अवंतिलाल जैन, कन्हैयालाल मनाना, गजानंद वर्मा, श्यामलाल मित्तल, गोपाल चौरसिया, अन्नाा विपट, रामचंद्र मोढ़, मौलाना मसूलद अहमद, शिवशंकर रावल, हरिसिंह हाड़ा, केशवलाल गुप्ता, हीरालाल दीक्षित, शिवचरण शर्मा, भगवतीलाल शर्मा, डा. हरीराम चौबे प्रमुख नाम है। रामचंद्र मोढ़ 10 अगस्त 1942 को पटनी बाजार में हुए लाठी चार्ज में घायल हो गए थे। उन्हें मरहम पट्टी के लिए अस्पताल लाए थे वे वहां से फरार हो गए थे। अन्नाा विपट ने अपनी पीठ पर लाठी के 100 प्रहार झेले थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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